छोटे छोटे आपातकाल

राकेश तिवारी मोदी सरकार ने पिछले एक वर्ष में अकादमिक और सांस्कृतिक संस्थानों में जिन लोगों को शीर्ष पदों पर…

पहचान खोते शहर

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी पहले हर शहर की अपनी संस्कृति थी, पहचान थी; रिवाज था। हर चीज के मिलने का स्थान तय…

लौकी की बर्फी

प्रशांत सिंह अबकी बार जब घर से लौट रहा था तो घर पर मां नहीं थीं। कोई जरूरी काम आ…

योग का मर्म

प्रेम कुमार मणि का पत्र ‘योग और विपस्सना’ (24 जून, चौपाल) पढ़ा। इसमें योग (पतंजलि) और विपस्सना (बुद्ध) इन दो…

बाजार में लाचार

बाजार, सत्ता और मनुष्य के रिश्ते इस पृथ्वी पर शुरू से रहे हैं। मनुष्य अपनी जरूरत की वस्तुओं को लेने…

कमलेश

उनमें कभी इस बात की उकताहट नहीं देखी गई कि अपनी रचनात्मक उपस्थिति से कोई हलचल पैदा करें। किसी वैचारिक…

मतांतर : बेवजह बौखलाहट

महेश जायसवाल हिंदी का संबंध सदा भारतीय जीवन की मिश्रणशीलता से रहा है। इसलिए साहित्य में शुद्धतावाद न पहले कभी…

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