कबीर ने कहा है, ‘मन मैला तन उजला बगुला कपटी अंग/ तासों तो कौआ भला तन मन एक ही रंग।’
हमारी संस्कृति में हंसी-मजाक की पुष्ट परंपरा रही है। गोपियां न केवल ऊधो पर व्यंग्य बाण चलाती हैं, बल्कि उनका…
समाज का अभिन्न अंग होने के कारण व्यक्ति विशाल जनसमूह का ही एक अटूट हिस्सा है।
यह शाश्वत सत्य है कि जीवन दो शब्दों के आसपास है- संघर्ष और जिजीविषा।
मेरे एक मित्र अक्सर बगल वाली दुकान पर लगे रंजन पेन के बोर्ड को देखते ही कहते हैं कि मैं…
आज पूरी दुनिया में किशोर उम्र के बच्चे धीरे-धीरे इंटरनेट आधारित आनलाइन गेम और वीडियो गेम के जाल उलझ चुके…
अप्रतिम सुंदरता की मूर्ति सरीखे पलाश के रक्ताभ फूल मार्च महीने में खिलना शुरू करते हैं।
इस पगडंडी का रास्ता कूड़े के उपलों को नकारने में नहीं, बल्कि उसकी जगह मन-भावन कलई करके स्वच्छ भारत सिद्ध…
पानी को धरती में जाने से रोकने का प्राचीन और पारंपरिक तरीका था कि जानवरों के गोबर के साथ चूने…
चलते समय का थोड़ा हो-हल्ला होने के बाद गाड़ी स्टेशन से सरकने लगी थी।
एक शोध के अनुसार विज्ञापनों की दुनिया आज अरबों रुपए की हो चली है।
अब हमें केवल इतना करना है कि खयाली पुलाव बनाना छोड़ कर उस शाही पुलाव को बनाने का जिम्मा उठाना…