कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अक्टूबर में शुद्ध रूप से 12.73 लाख अंशधारक जोड़े। यह एक साल पहले इसी महीने की तुलना में 10.22 प्रतिशत अधिक है। श्रम मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2021 में शुद्ध रूप से 12.73 लाख अंशधारक ईपीएफओ के साथ जुड़े। एक साल पहले अक्टूबर 2020 में ईपीएफओ से 11.55 लाख सदस्य जुड़े थे।

अक्टूबर में जुड़े नए अंशधारकों में से 7.57 लाख नए सदस्य पहली बार कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम 1952 के तहत पंजीकृत हुए हैं। वहीं इस महीने में करीब 5.16 लाख सदस्य ईपीएफओ से अलग होने के बाद अपने खाते को स्थानांतरित कर इससे दोबारा जुड़े।

मंत्रालय ने बताया कि वेतन आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 22-25 वर्ष की उम्र के कर्मचारी नए पंजीकृत होने वाले सदस्यों में सबसे ज्यादा हैं। अक्टूबर 2021 में इस उम्र समूह के शुद्ध रूप से 3.37 लाख अंशधारक ईपीएफओ से जुड़े। इसके अलावा 18-21 साल की उम्र के भी 2.50 लाख नए सदस्य जुड़े हैं।

राज्यों के स्तर पर महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक ने कुल मिलाकर 7.72 लाख नए अंशधारक जोड़े। यह कुल नए सदस्यों का 60.64 प्रतिशत है। स्त्री-पुरूष के आधार पर देखें तो अक्टूबर 2021 में नए पंजीकृत अंशधारकों में 2.69 लाख की संख्या के साथ 21.14 प्रतिशत महिलाएं थीं।

इस बीच, केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना में ग्राहकों की सेविंग्स की सुरक्षा की जाएगी। यह चीज निजी कंपनियों के कॉरपोरेट बॉन्ड में योजना (ईपीएफओ) चलाने वाले संगठन द्वारा निवेश पर किए गए रिटर्न की परवाह किए बिना होगी। यह घटनाक्रम अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कैपिटल द्वारा ईपीएफओ को अपने ब्याज भुगतान में चूक के बाद देखने को मिला है।

नाम न छापने की शर्त पर अंग्रेजी वेबसाइट ‘दि प्रिंट’ से बात करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, सरकार के पास ईपीएफओ के निवेश पर मिलने वाले रिटर्न से हमेशा एक बफर या सरप्लस होता है, जो सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों की बचत सुरक्षित रहे।