नए कृषि कानूनों को लेकर किसान महीने भर से धरने पर बैठे हैं। दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर ठंड में खुले आसमान के नीचे बड़ी संख्या में किसान आंदोलन कर रहे हैं। केंद्र सरकार से कई राउंड की बातचीत के बाद भी कोई हल नहीं निकला है। किसान जहां इन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं तो वहीं सरकार की तरफ से उन्हें इन कानूनों के फायदे बताने के लगातार प्रयास जारी हैं।

इ्न्हीं सबके बीच बीजेपी के कुछ नेताओं ने आंदलन कर रहे किसानों को खालिस्तानी बताया है तो कुछ उन्हें कम्युनिस्ट बता कर आंदोलन को नौटंकी करार दे रहे हैं। बिहार के कृषि मंत्री ने तो आंदोलन कर रहे किसानों के लिए बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया है। कुछ मीडिया संस्थान भी किसानों के आंदोेलन पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। रिपब्लिक टीवी के चीफ अर्नब गोस्वामी ने कहा है कि आंदोलन कर रहे किसानों को कुछ राजनीतिक दलों ने बर्गलाया है। उन्होंने रिपब्लिक टीवी पर अपने शो पूछता है भारत में बीजेपी की विरोधी पार्टियों पर किसानों को भड़काने का आरोप लगाया है।

अर्नब गोस्वामी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने 5 सासंदों को किसानों के पास भेजा है और कहा है कि किसान आंदोलन जारी रखें। अर्नब ने कहा कि ममता बनर्जी को बंगाल में हो रहा खून खराबा नहीं दिख रहा है।

अर्नब गोस्वामी ने चीखते हुए अपने शो में कहा कि जब ममता बनर्जी को लग गया है कि वह तो आने वाले चुनाव हारने वाली हैं तो उन्होंने किसानों को भड़काने का काम शुरू कर दिया है। अर्नब गोस्वामी ने कांग्रेस, आप और लेफ्ट पार्टियों पर भी देश में अशांति फैलाने का आरोप लगाया है।

बता दें कि कृषि कानून वापस लेने की मांग कर रहे किसानों के समर्थन में विपक्षी नेता आज राहुल गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलेंगे। वे 2 करोड़ किसानों के साइन किए हुए ज्ञापन को राष्ट्रपति को सौंपेंगे। वहीं किसानों की तरफ से साफ कह दिया गया है कि सरकार के प्रपोजल में दम नहीं, नया एजेंडा लाएं तभी बात होगी। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार किसानों की अनदेखी कर आग से खेल रही है, उसे जिद छोड़नी चाहिए।