एक तरफ केंद्र सरकार खेलों को बढ़ावा देने और एथलीटों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, दूसरी ओर भारतीय घुड़सवारी महासंघ (ईएफआई) की लापरवाही और मनमानी से घुड़सवारों का भविष्य अंधेरे में लटक गया है।
चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में जार्डन में होने वाले विश्व कप क्वालिफायर के लिए महासंघ ने बिना चयन ट्रायल के ही चार खिलाड़ियों और एक कोच के नाम अंतरराष्ट्रीय टेंट पेगिंग महासंघ (आईटीपीएफ) को भेज दिए हैं। इस कारण कई प्रतिभाशाली घुड़सवार परेशान हैं।
महासंघ की कार्यकारी समिति ने विश्व कप क्वालिफायर्स के लिए चार एथलीटों के साथ कर्नल (रिटायर्ड) तरसेम सिंह को कोच-सह-प्रबंधक के रूप में नामित किया है, लेकिन इस चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी साफ झलक रही है। महासंघ ने पहले 5 से 12 जनवरी तक राष्ट्रीय घुड़सवारी प्रतियोगिता के लिए आरटीसी हरियाणा पुलिस से जगह मांगी थी।
ट्रायल की घोषणा, लेकिन मैदान पर कुछ नहीं
उसके बाद 13 से 16 जनवरी तक गुरुगाम के आरटीसी भोंडसी में भारतीय टीम के लिए चयन ट्रायल होने थे। हालांकि, ट्रायल शुरू होने से पहले ही महासंघ ने 21 संभावित खिलाड़ियों की सूची जारी की, जो अगले ही दिन गणना में गलती का हवाला देकर 16 पर सिमट गई।
बता दें कि टेंट पेगिंग विश्व कप क्वालिफायर जॉर्डन में 29 से 31 जनवरी 2026 तक है। इस टूर्नामेंट 5 खिलाड़ियों की टीम हिस्सा लेती है। हालांकि, बिना चयन ट्रायल के 4 खिलाड़ियों और कोच के नाम की सूची भेज दी।
‘कोच बनने की जल्दबाजी’ का आरोप
नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कई खिलाड़ियों ने एक स्वर में कहा कि कर्नल (सेवानिवृत्त) तरसेम सिंह कोच बनने की जल्दबाजी में थे, इसलिए उन्होंने ग्राउंड जूरी के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) अशोक कुमार यादव के साथ मिलकर यह सूची तैयार की।
ITPF के जुर्माने से घबराया महासंघ
खिलाड़ियों का कहना है कि जब उन लोगों ने नियमों की अनदेखी पर सवाल उठाए, तो महासंघ ने ट्रायल रोक दिए और नई तारीखों का वादा किया, लेकिन ट्रायल हुआ नहीं। इसके बजाय, आनन-फानन में एक नई सूची जारी कर चार खिलाड़ियों और कोच के नाम आईटीपीएफ को भेज दिए गए।
जवाब में आईटीपीएफ ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि भागीदारी की पुष्टि के बाद नाम वापस लेने पर जुर्माना लगेगा। इस रवैये से घबराकर चयन समिति ने 18 जनवरी को बिना ट्रायल के आधार पर नाम भेज दिए। अब जिन खिलाड़ियों के नाम सूची में नहीं हैं, वे हताश हैं।
खिलाड़ियों में गुस्सा और निराशा
एक खिलाड़ी ने कहा, ‘हम साल भर मेहनत करते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने की बारी आती है तो मौका नहीं दिया जाता है। ट्रायल होने चाहिए थे ताकि प्रदर्शन के आधार पर चयन हो। खेल मंत्रालय तक यह सब बातें पहुंचती नहीं है तभी महासंघ के सदस्य मनमानी करने में लगे हुए हैं।’
एक अन्य खिलाड़ी ने कहा, ‘महासंघ में बदलाव जरूरी है, वरना कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक नहीं पाएगा। वर्तमान टीम भी पूरी तरह तैयार नहीं है, जबकि मेजबान टीम काफी मजबूत है।’
खराब मौसम बना बहाना
ट्रायल के तीन दिनों तक कुछ नहीं हुआ। सभी घुड़सवारों को अपने घोड़ों के साथ कैंप छोड़ने को कहा गया। 16 जनवरी को महासंघ ने आईटीपीएफ को ईमेल भेजकर खराब मौसम का हवाला दिया और कहा कि भारतीय टीम क्वालिफायर में हिस्सा नहीं ले सकती। उनका ग्रुप बदल दिया जाए।
कार्यवाहक अध्यक्ष ने आरोप नकारे
कार्यवाहक अध्यक्ष कर्नल (रिटायर्ड) जगत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, कोई खिलाड़ी परेशान नहीं है। अगर हम सूची नहीं भेजते तो आईटीपीएफ ढाई लाख का जुर्माना लगाता। हमने ट्रायल कराने की कोशिश की, लेकिन 15 जनवरी के बाद हरियाणा पुलिस का स्थल उपलब्ध नहीं हुआ। साथ ही यह सूची खेल मंत्रालय को भी भेजी जा चुकी है।
