कंप्यूटर पर घंटों काम करना आज की कार्य-संस्कृति में एक सामान्य सी बात है। यह स्थिति ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए तो है ही, वे भी घंटों स्क्रीन पर बिताते हैं जिनका अपना व्यवसाय है या जो घर पर रहकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इस नई कार्य-संस्कृति की वजह से लोगों का ज्यादातर समय बड़े मनोवैज्ञानक दबाव के बीच बीत रहा है। लैपटाप, मोबाइल फोन और टीवी के साथ लंबा समय बिताने की आदत या मजबूरी खासतौर पर आंखों के लिए बहुत नुकसानदेह है।

आज लोग विभिन्न वजहों से दस से भी ज्यादा घंटे स्क्रीन के सामने बैठकर गुजार रहे हैं, जिस कारण आंखों में भारीपन, थकान, जलन, लाली और सूखेपन की शिकायतें बढ़ रही हैं। ज्यादा समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ता है। हम जितना अधिक स्क्रीन देखते हैं, हमारी आंखों की नमी और पलक झपकने की दर उतनी ही कम होती जाती है। इससे आंखों को नुकसान पहुंचता है। हमें अभी कुछ और दिन ऐसे ही बिताने हैं। ऐसे में आंखों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

आंखों पर जोर
आमतौर पर दफ्तर में लैपटाप व कंप्यूटर डेस्क पर कुर्सी से उचित दूरी और उचित ऊंचाई पर रखे होते हैं। पर घर से काम कर रहे लोग लैपटाप को कभी बिस्तर पर तो कभी गोद में रखकर काम करते हैं। इससे आंखों की मांसपेशियों पर खासा जोर पड़ता है। साथ ही बैठने की गलत मुद्रा से कमर में दर्द की समस्या भी हो सकती है। इसलिए घर से काम करने के दौरान भी लैपटाप की आंखों से उचित दूरी और उचित ऊंचाई का ध्यान रखें। इससे आंखों पर कम प्रभाव पड़ता है और शारीरिक मुद्रा भी ठीक रहती है।

अगर आंखों पर चश्मा चढ़ा है तो बिना चश्मे के काम न करें। अगर आप डिजिटल कंटेंट, आनलाइन गेम या सोशल मीडिया पर ज्यादा समय गुजार रहे हैं तो भी आपको चश्मा पहनना चाहिए। इस बारे में बरती गई लापरवाही का आंखों की देखने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।

झपकाते रहें पलक
सामान्य तौर पर व्यक्ति एक मिनट में करीब बारह से पंद्रह बार पलकें झपकाता है। लेकिन टीवी और मोबाइल फोन देखते समय वह तीन से चार बार ही पलक झपकाता है। पलक नहीं झपकाने के कारण आंखों में बनने वाला तरल पदार्थ आंखों में नहीं फैल पाता है। इस कारण आंखों में खुजली और जलन होने लगती है। इससे बचने का बेहतर तरीका है कि याद से पलकों को बार-बार झपकाते रहें। टीवी, मोबाइल फोन देखते समय या लैपटाप पर काम के दौरान सामान्य तौर पर पलकें झपकाने की कोशिश के अलावा हर घंटे के अंतराल पर पलकों को खोलें और बंद करें और कुछ मिनट तक यह क्रिया दुहराएं।

खतरनाक रोशनी
टेलीविजन और मोबाइल फोन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों पर बुरा प्रभाव डालती है। इससे आंखों में जलन, भारीपन और सूखेपन की शिकायत बढ़ जाती है। सूखेपन का मतलब आंखों में आंसू यानी पानी की कमी से है। कई दिनों तक यह समस्या होने पर सिरदर्द भी हो सकता है। इससे बचने का एकमात्र उपाय है कि स्क्रीन पर थोड़ा कम समय बिताएं। साथ ही बैठे-बैठे आंखों की कसरत करें। इसके लिए दूर रखी किसी चीज को बिना पलक झपकाएं एकटक देखें, ऐसा करने से आंखों की क्षमता में इजाफा भी होता है।

जरूरी एहतियात
’ लैपटाप, मोबाइल व कंप्यूटर पर काम करते समय कमरे में पर्याप्त रोशनी जरूर रखें अन्यथा आंखों पर अनावश्यक जोर पड़ेगा।
’ दिन में चार से पांच बार आंखों पर पानी के छींटें मारें। सुबह में यानी दांतों की सफाई के दौरान भी रोजाना ऐसा करना चाहिए। साथ ही आंखों को बार-बार न रगड़ें।
’ बिना चिकित्सक के परामर्श के किसी भी तरह के आई-ड्राप का इस्तेमाल न करें। आंखों में खुजली या दूसरी परेशानी होने पर डाक्टर को जरूर दिखाएं।
(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)