अठारह सौ सत्तावन की लड़ाई के दौरान चपाती आंदोलन ने अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। इस आंदोलन में एक गांव का चौकीदार दूसरे गांव में चपाती बना कर ले जाता था, चौकीदार वह रोटी खुद खाता और एक-एक हिस्सा अन्य को भी देता, जिसके हिस्से सबसे आखिरी निवाला आता उसे ही तीसरे गांव में रोटी पहुंचानी होती। इसका मतलब होता था कि जिस गांव में रोटियां खत्म हुर्इं, उस गांव के लोग क्रांति के लिए तैयार हैं। 1857 में ईस्ट इंडिया कंपनी के सैन्य अधिकारी डॉ गिल्बर्ट हैडो ने ब्रिटेन में अपनी बहन को इस चपाती आंदोलन के बारे में बताया था। बताते हैं कि इस आंदोलन का कोई सबूत न मिलने से अंग्रेजी अफसर परेशान हो गए थे। उन्हें क्रांति की भनक तक लगने नहीं पाई थी। नब्बे हजार से ज्यादा भारतीय सैनिकों ने भी एक गांव से दूसरे गांव में रोटियां भिजवाई थीं। 5 मार्च, 1857 तक यह चपाती अवध से रुहेलखंड और फिर दिल्ली से नेपाल गई थी।
सूडान में अभी कुछ साल पहले तो रोटी के लिए उन्नीस लोगों की जान चली गई, क्योंकि वहां रोटी की कीमत बढ़ने से विरोध के लिए आवाज उठी थी। ईरान में अमेरिकी प्रतिबंध लगा, तो वहां एक रोटी की कीमत पच्चीस हजार रियाल तक पहुंच गई थी, जिसके लिए लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ा था। यही हाल वेनेजुएला का भी रहा। जहां महंगाई का सबसे पहला असर रोटी की कीमतों पर पड़ा।
रोटी त्योहार से बैंक तक
भारत में अब रोटी बैंक बन चुका है और यहां रोटी से जुड़ा एक त्योहार भी है। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में बारा शहीद की दरगाह पर हर साल रोटी फेस्टिवल लगता है, जिसे रोत्तेल्ला पंडूंगा भी कहते हैं। यह त्योहार पांच से छह दिन के लिए होता है, जिसमें लोग एक-दूसरे से रोटी बदलते हैं। इसकी काफी मान्यता है। वहीं, पिछले दिनों रोटी बैंक को लेकर काफी चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात में इसकी सराहना की थी। दरअसल, रोटी बैंक इस समय भारत के कई राज्यों के शहरों में निजी संस्थाओं की ओर से चलाए जाने वाला एक सहायता कार्यक्रम है, जो लोगों को भूखे नहीं सोने देता। मध्यप्रदेश से लेकर उत्तर प्रदेश में लोग अपने स्तर पर रोटी गाड़ी बना कर लोगों के घरों से बची रोटियों को इकट्ठा करते हैं और फिर इसे उसी दिन गरीबों में बांट दिया जाता है। कुछ बैंकों ने तो शहरों में ऐसे डिब्बे लगा रखे हैं, जिनमें लोग खुद आकर रोटियां रख जाते हैं। रोटी में विश्व रिकॉर्ड भी है। 2012 में जामनगर में एक सौ पैंतालीस किलोग्राम की तीन मीटर की प्लेट में आने वाली रोटी बनाई गई। यह विश्व की सबसे बड़ी रोटी है।
फिरंगी रोटी
भारत में रोटियों की सबसे ज्यादा किस्में हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह सिर्फ भारत का एक प्रमुख खाना है। रोटी भारत के अलावा पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, सिंगापुर, मालदीव, मलेशिया, फिजी, दक्षिण अफ्रीका, जैमेका, गुयाना में भी खाई जाती है, बस आकार, प्रकार और स्वाद अलग है। नेपाल में भाई दूज के मौके पर सेल और फेन रोटी का काफी महत्त्व है। यह बहन अपने भाई के लिए ससुराल से बना कर ले जाती है। दोनों रोटियों में काफी अंतर है, यह चावल के आटे की बनती है। सेल रोटी में मीठे के लिए गुड़ और पके केले का उपयोग होता है, उसी तरह फेन रोटी में चावल के आटे में घी लगा हुआ मोयन लगा कर उसे रोल करते हैं और काट कर बेलते और तलते हैं। श्रीलंका में कोटू रोटी, पोल, गोडंबा रोटी और नारियल रोटी काफी पसंद की जाती है। नारियल रोटी बनाने के लिए घी और नारियल के साथ बेकिंग सोडे का उपयोग किया जाता है। वहीं कोटू रोटी को सब्जी या मांस में मिला कर परोसते हैं। मैक्सिकन व्यंजन में हमारी रोटी की तरह ही टोर्टिला होती है, जिसमें सब्जियां भर कर उसे रोल करते हैं। भारत में इस व्यंजन को मिला-जुला बना कर रोटी बरिटो कर दिया गया है। इसी तरह कासाडीला भी होता है। कासाडीला भी रोटी की तरह ही है, बस इसमें मैक्सिकन रूप देने के लिए कुछ सब्जियों को रोटी के अंदर भरा जाता है। इंडोनेशिया में रोटी परयाराम और रोटी कोंडें काफी प्रसिद्ध हैं।
फिल्मों और कवियों की रोटी
सुदामा पांडेय धूमिल की कविता ‘रोटी और संसद’- ‘एक आदमी रोटी बेलता है, एक आदमी रोटी खाता है, एक तीसरा आदमी भी है, जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है। वह सिर्फ रोटी से खेलता है। मैं पूछता हूं- यह तीसरा आदमी कौन है? मेरे देश की संसद मौन है।’ आज भी सबसे ज्यादा प्रहार करती है। आशुतोष की कविता ‘एक रोटी की आस में’ आज की जिंदगी और रोटी के इंतजाम का सबसे सटीक वर्णन करती है। फिल्मों में रोटियों का जिक्र फिल्म के शीर्षक से लेकर संवादों में दिखाई पड़ता है। राजेश खन्ना की ‘रोटी’ और मनोज कुमार की ‘रोटी कपड़ा और मकान’ अपने समय की हिट फिल्मों में शामिल थीं, क्योंकि इसके नाम में ही नहीं, बल्कि पटकथा में भी रोटी शामिल थी। ऋषि कपूर की ‘इज्जत की रोटी’ भी रोटी नाम से बनने वाली प्रमुख फिल्मों में से एक रही है।
आप किसी भी देश मे कुछ भी खाएं, लेकिन आपको रोटी का विकल्प किसी न किसी रूप में मिल सकता है। जैसा कि ‘होम डिलीवरी’ फिल्म में बोमन ईरानी का काफी मशहूर संवाद है- वे पिज्जा की दुकान में जाते है और कहते हैं यहां पिज्जा है, गार्लिक ब्रेड, ब्राउन ब्रेड, वाइट ब्रेड, अनियन ब्रेड है, लेकिन हैं तो सब सब्जी रोटी। जैसे पिज्जा वेजिटेबल सैंडविच है, वह इटली के लिए पिज्जा है और भारत के लिए सब्जी और रोटी।

