कुलीना कुमारी

पिछले दिनों दिल्ली के छतरपुर इलाके में एक युवक ने अपनी महिला मित्र की हत्या कर दी, जो उसके साथ लिव-इन में रह रही थी। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार यह हत्या उसने बेवफाई के शक में की थी। यह अलग बात है कि बाद में उसने भी खुदखुशी कर ली। जरूरी बात यह है कि लिव-इन में रहने वाली बहुत-सी लड़कियों का नुकसान आए दिन तथाकथित प्रेमियों की वजह से होता रहता है। इससे लड़कियां कैसे बचें? ऐसा क्यों है कि लड़कियां पढ़-लिख कर, आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद अपने साथी के चुनाव में धोखा खा जाती हैं। कहीं इसकी वजह बड़ी उम्र तक शादी न होने से उनकी यौन आवाश्यकता का हावी होना तो नहीं, जो शादी, रीति-रीवाज के बिना भी वे प्यार के नाम पर पुरुष के बहकावे में आ जाती हैं। या फिर सामाजिक खुलेपन के नाम पर शादी से पहले लिव-इन जानबूझ कर स्त्री शरीर के दुरुपयोग का प्रयास तो नहीं।

शहरों में यह खेल खूब खेला जा रहा है। लड़कियां मां-बाप से बोल कर आती हैं कि वे कैरिअर बना रही हैं, पर विभिन्न प्रकार के लोगों से घिरे शहर में जैसे वे पहचान ही नहीं पातीं कि उसका कौन अपना है, कौन पराया। बड़ों की छत्रछाया का अभाव और शहरी आपाधापी में कई बार वे जैसे संज्ञा शून्य हो जाती हैं। फैशनेबल चीजें और आर्थिक न्यूनतम आवश्यकता भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। इसकी बहुत संभावना है कि कुछ शहरी लड़कियां खर्च से बचने या कम करने के उद्देश्य से वे तथाकथित प्रेमी के साथ एक ही फ्लैट में रहना स्वीकार कर लेती हों। या फिर दूर रह कर भी चोरी-छिपे कभी-कभी प्रेमी से उसका संबंध बन जाता है। बेशक सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन में रहने वाली लड़कियों के लिए सुरक्षा देने की बात कही थी, पर इसका एक कमजोर पक्ष यह है कि ऐसी लड़की के लिए यह साबित करना कि वह लिव-इन या रिलेशनशिप में रही है, आसान नहीं होता, क्योंकि चोरी के संबंध में प्रमाण जुटाना बहुत मुश्किल होता है। सबसे पहली बात कि वह स्वेच्छा से साथ रहने लगती है, तो उसके पास शादी का प्रमाण नहीं होता। फिर पुरुष जिस अधिकार से शादी के बाद हर चीज, राशन कार्ड, मकान आदि में अपनी पत्नी का नाम शामिल करता है, वैसा लिव-इन या रिलेशनशिप में रहने वाली प्रेमिका के प्रति वह नहीं करता। यही क्यों, सामाजिक समारोह में भी वह चोरी से रहने वाली गर्लफ्रेंड को लेकर शामिल नहीं होता। ऐसे में बंद कमरे में या चोरी से आपसी यौन संबंध तो बन जाते हैं, मगर लड़की को सामाजिक अधिकार नहीं मिलता। इससे सबसे अधिक लाभ पुरुष को ही होता है कि बिना बंधन में बंधे उसे स्त्री का शरीर मिल जाता है और उसकी बिना शादी वाली आजादी भी बरकरार रहती है। तभी लड़के की शादी कहीं और तय होने की स्थिति में या फिर किसी नई लड़की के संपर्क में आने पर वह पुरानी लड़की को दूध में मक्खी की तरह बाहर निकाल कर फेंक देता है।

लिव-इन में रहने वाली हैदराबाद की एक लड़की के बारे में पता चला कि लड़के की शादी तय होने पर लड़के ने उसे अपने किसी और दोस्त के पास भेज दिया और कुछ दिन इस्तेमाल कर उसके दोस्त ने भी उसे किसी और के पास भेज दिया। वह अपनी आर्थिक कमजोरी और मर्द की बेवफाई की वजह से लिव-इन वाली लड़की कम, मजबूरन अपना जिस्म बेचने वाली अधिक बन गई। हाल ही में एक और मामला सामने आया कि आईटीबीपी का एक असिस्टेंट कमांडेंट दो साल तक यूपी की एक लड़की को अपने प्रेम के जाल में फंसाए रखा। उससे शादी का वादा कर रिश्ते भी बनाए और उसका गर्भपात तक करा दिया, लेकिन जब महिला शादी पर अधिक जोर डालने लगी तो उसे छोड़ दिया। अब वह लड़की खुद को ठगी महसूस कर रही है। उसे बाद में पता चला कि वह सिर्फ उसी के साथ नहीं, पहले भी कई लड़कियों का इस्तेमाल कर चुका है। अब वह उस पर शिकायत वापस लेने के लिए दवाब डाल रहा है। इसी से संबंधित एक अन्य मामले में पीड़ित लड़की ने बताया था कि उसका प्रेमी लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने के बावजूद एक दिन बिना किसी जानकारी के उसे छोड़ गया। अब वह जब उससे शादी नहीं करेगा, तो दूसरा पुरुष कहीं समझ न जाए कि उसकी देह इस्तेमाल की हुई है। वह इस वजह से बहुत परेशान थी। एक तरफ जब कुंवारी लड़कियों को होने वाले पति के सामने पवित्र बने रहने का शौक है, तो फिर वे बिना शादी और कानूनी मान्यता के इस सामाजिक खुलेपन के नाम पर खुद से खेलने की इजाजत ही क्यों देती हैं? इसके लिए जरूरी है कि युवा लड़कियां उन सभी परिस्थितियों पर पहले से विचार करें, जो रिश्ता बनने के बाद अचानक टूटने पर उन्हें सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि अगर प्रेमी-प्रेमिका दोनों के मन में वफादारी हो तो यह लिव-इन रिलेशन उतना खराब नहीं, लेकिन अभी तक मन को मापने का पैमना नहीं बना। पैमाना तो सामाजिक और कानूनी विधान ही है। ऐसे में अगर कोई युवती लिव-इन जैसी बातों पर भरोसा करने के लिए तैयार हो, तो उसे प्रेमी को साथ लेकर एक शपथपत्र अपनी नजदीकी अदालत में पेश कर देना चाहिए, जिसमें यह शामिल हो कि जब भी संबंध टूटे, उसमें दोनों पक्षों की सहमति हो। एकतरफा संबंध टूटने पर मुआवजे की शर्त हो। ऐसा होने पर लिव-इन और प्रेम में संबंध बनाने वाली लड़की को सुरक्षा मिलेगी। पुरुष की मनमर्जी और जब जी चाहे बच कर भाग जाने की सोच पर लगाम लगेगी। ये छोटी-छोटी बातें हैं, लेकिन इन बातों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। जरूरत इस बात की भी है कि बालिग होती लड़कियों को बताया जाए कि हर मामले में स्त्री, पुरुष के बराबर नहीं होतीं। खासकर देह और यौन संबंध के मामले में। पुरुष संबंध बनाने के बावजूद बेफिक्र रह सकता है, जबकि हो सकता है, महिला उसकी परिणति के रूप में गर्भ धारण कर ले। ऐसी ही कुछ और बातें महिलाओं को अलग बनाती हैं। या तो वे इतनी मजबूत हों कि मनचाहा संबंध और उससे उत्पन्न बच्चे को पालने के लिए तैयार हों। अगर भारतीय संस्कार अब भी उसकी जड़ों में हों तो ध्यान रखना चाहिए कि नैतिकता व्यवहार में लागू करने की चीज है। वे ऐसा कुछ न करें, जिसकी वजह से बाद में पछताना पड़े। अभिभावकों का भी कर्तव्य है कि खुलेपन के नाम पर अपनी बेटियों को उसकी छूट न दें, जो उन्हें सिर उठा कर जीने में बाधक बनें। प्रेम बुरा नहीं, धोखा बुरा है। कितनी बार इसकी वजह से महिला तनाव में चली जाती या आत्महत्या जैसा कदम तक उठा लेती है। इसलिए ऐसा माहौल बने, उससे पहले ही सजग रहने की जरूरत है।