नाज़ ख़ान

यह इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजे, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है’। मगर भारत जैसे परंपरावादी देश में ज्यादातर प्रेमी आग की इस दरिया को पार करने से पहले ही मौत घाट उतार दिए जाते हैं। यानी सम्मान के लिए प्रेमी जोड़ों की हत्या कर दी जाती है। इक्कीसवीं सदी में जहां भारत में शिक्षा का स्तर लगातार सुधर रहा है और विकास के दावे किए जा रहे हैं, वहीं आॅनर किलिंग जैसी घटनाएं इन दावों को मुंह चिढ़ाती नजर आती हैं। निजी दुश्मनी और सम्पत्ति विवाद के बाद ज्यादातर हत्याएं प्यार व शारीरिक संबंधों के कारण की जाती हैं। यही वजह है कि देश के ज्यादातर राज्यों, पंजाब, हरियाणा, बिहार, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में सम्मान के नाम पर की जाने वाली हत्याओं के मामले सामने आ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी एक रिपोर्ट में माना कि विश्व में हर साल करीब पांच हजार हत्याएं सम्मान के नाम पर की जाती हैं और इनमें भारत भी शामिले है।

भारत में इस तरह के मामले इसलिए भी बढ़ रहे हैं, क्योंकि यहां अपराधी कानून के शिकंजे से आसानी से बच निकलते हैं। हालांकि इस तरह के अपराधों के खिलाफ कई पुख्ता कानून हैं। लेकिन लचर कानून व्यवस्था का लाभ जहां अपराधियों को सजा से बचा लेता है वहीं वोट बैंक की राजनीति और जाति के आधार पर समाज से मिल रहा संरक्षण इन अपराधों को जड़ से उखड़ने नहीं देता। यही कारण है कि विकसित राज्यों की सूची में रहा गुजरात भी अब इससे अछूता नहीं रहा। यहां भी जाति और इससे जुड़े सम्मान की तरफ लोगों का जुड़ाव तेजी से बढ़ रहा है और आॅनर किलिंग के मामले सामने आ रहे हैं।

भारत में चर्चा का विषय रहा आरुषि हत्या कांड हो या पाकिस्तान का चर्चित मुख्तारन माई का मामला। इन सबसे एक बात निकल कर आती है कि इस तरह के मामलों में सबसे ज्यादा शोषण का शिकार महिलाएं बन रही हैं। उन्हें घर की इज्जत के नाम पर शोषित किया जाता है। जबरन विवाह कराना और प्रेम संबंधों के कारण मौत के घाट उतार देना आम बात है। हालांकि अब पाकिस्तान जैसे देशों से भी इस अपराधों के खिलाफ आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं।

बीते साल पाकिस्तान में बरेलवी पंथ से जुड़े एक संस्थान सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल ने झूठी शान के खिलाफ की जाने वाली हत्याओं के खिलाफ फतवा जारी किया था। इसमें आॅनर किलिंग को न सिर्फ गैरइस्लामी और अक्षम्य पाप करार दिया गया बल्कि कहा गया कि अपनी पसंद से शादी करने वाली महिलाओं को जलाना इस्लाम के खिलाफ है। भारत में आंदोलन तो हो रहे हैं, लेकिन कोई सशक्त आवाज इस कुप्रथा के खिलाफ नहीं बन पा रही है।