Guru Gochar 2026: ज्योतिष शास्त्र में गुरु बृहस्पति का नवग्रह में महत्वपूर्ण स्थान है। वह एक राशि में करीब एक साल तक रहते हैं। लेकिन गुरु बृहस्पति के मिथुन राशि में आते ही वह अतिचारी गति से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में वह एक राशि में करीब 3 बार राशि परिवर्तन करेंगे। गुरु बृहस्पति एक निश्चित अवधि के बाद नक्षत्र परिवर्तन भी करते है जिसका असर 12 राशियों के जीवन में किसी न किसी तरह से अवश्य देखने को मिलता है। बता दें कि इस समय गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में विराजमान है और वह पुनर्वसु नक्षत्र में विराजमान है। ऐसे में किसी न किसी तरह से जातकों के जीवन में किसी न किसी तरह से प्रभाव देखने को मिलने वाला है। वहीं जनवरी माह के अंत में गुरु बृहस्पति नक्षत्र पद परिवर्तन करने वाले हैं। इस समय गुरु पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे पद में विराजमान है और 30 जनवरी को पहले पद में पहुंच जाएंगे। गुरु की चाल में ये बदलाव का असर 12 राशियों के जीवन में किसी न किसी तरह से अवश्य देखने को मिलेगा। लेकिन इन 5 राशि के जातकों को सबसे अधिक लाभ देखने को मिलने वाला है। ये विश्लेषण चंद्र राशि के आधार पर किया जा रहा है। आइए जानते हैं इन लकी राशियों के बारे में…
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 30 जनवरी को को 10:53 ए एम बजे गुरु बृहस्पति पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे पद में प्रवेश कर जाएंगे और 20 अप्रैल तक इसी नक्षत्र पद में रहेंगे। बता दें की गुरु जून 2026 तक पुनर्वसु नक्षत्र तक रहने वाले हैं। पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। इस नक्षत्र में गुरु के आने से कुछ राशि के जातकों को सुख, समृद्धि और सफलता हासिल हो सकती है। भाग्य का किस्मत का साथ मिल सकता है।
मेष राशि (Mesh Zodiac)
मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का पुनर्वसु नक्षत्र में जाना कई मामलों में लाभकारी हो सकता है। इस राशि के जातकों के आत्मविश्वास, साहस में तेजी से वृद्धि हो सकती है। संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। आय के नए स्त्रोत खुलेंगे और भविष्य के लिए भी धन बचत कर पाने में सफल होंगे। बिजनेस में भी काफी लाभ मिल सकता है। नेटवर्किंग के माध्यम से आपको काफी लाभ मिल सकता है। जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती है।
मिथुन राशि(Mithun Zodiac)
इस राशि के जातकों के लिए गुरु का पुनर्वसु नक्षत्र में जाना लाभकारी हो सकता है। इस राशि के जातकों के व्यक्तित्व में एक निखार आ सकता है। निर्णय क्षमता में तेजी से वृद्धि हो सकती है।भाग्य का पूरा साथ मिल सकता है, जिससे आप कई क्षेत्रों में सफलता हासिल कर सकते हैं। निर्णय क्षमता में भी तेजी से वृद्धि हो सकती है। अविवाहितों को शादी का प्रस्ताव आ सकता है। प्रेम संबंध विवाह में बदल सकते हैं। पार्टनरशिप में किए जा रहे बिजनेस में खूब लाभ मिल सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जातकों को खूब सफलता हासिल हो सकती है।
तुला राशि (Tula Zodiac)
तुला राशि के लिए भी गुरु का पुनर्वसु नक्षत्र में जाना कई मायनों में खास हो सकता है। इस राशि के जातकों का अध्यात्म की ओर झुकाव होगा। ऐसे में कई धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकते हैं। इसके अलावा धार्मिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। उच्च शिक्षा पाने में सफल हो सकते हैं। काम, व्यापार या फिर घूमने के लिए विदेश यात्रा कर सकते हैं। समाज में मान-सम्मान की तेजी से वृद्धि हो सकती है।
धनु राशि (Dhanu Zodiac)
धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का पुनर्वसु नक्षत्र में लाभकारी हो सकता है। वैवाहिक जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती है। साझेदारी में किए गए व्यापार में काफी लाभ मिल सकता है। नया व्यापार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इस अवधि में लाभकारी हो सकता है। नौकरीपेशा जातकों को काफी लाभ मिल सकता है। सार्वजनिक छवि को मजबूत करेगा।
मीन राशि (Meen Zodiac)
मीन राशि के जातकों के लिए गुरु का चतुर्थ भाव में गोचर काफी लाभकारी हो सकता है। इस राशि के जातकों को भौतिक सुखों की प्राप्ति हो सकती है। घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती है। करियर में भी स्थिरता बनी रहेगी। आप अपने काम को पूरी मेहनत और लगन से कर सकते हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी रहने वाली है। इसके साथ ही धन संचित करने में कामयाब हो सकते हैं।
गुरु के शुभ फल के लिए करें ये उपाय
गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करना, हल्दी मिले जल से स्नान करना, केसर का तिलक लगाना, “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जप करना तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों को दान देना लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही, यदि व्यक्ति सही कर्म और सन्मार्ग का पालन करे, तो इस गोचर का सकारात्मक प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है।
सूर्य का रत्न माणिक पहनना काफी लाभकारी माना जाता है। लेकिन कब कैसे और क्यों पहनना चाहिए। इससे बारे में जानना बेहद जरूरी है। इसके अलावा असली और नकली माणिक्य की पहचान करना भी बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कहीं आप नकली माणिक्य तो नहीं पहन रहे हैं? जानें असली रत्न की पहचान, लाभ और धारण करने की सही विधि
डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
