दिल के रोगों का एक बड़ा कारण कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ स्तर माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में हार्ट डिज़ीज़ से होने वाली मौतों के आंकड़ों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे खराब डाइट और बिगड़ती लाइफस्टाइल सबसे अहम वजहें हैं। डेली रूटीन में शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव, स्मोकिंग और ज्यादा ऑयली व मसालेदार फूड का सेवन ब्लड में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाता है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। अगर समय रहते डाइट में सुधार, रेगुलर एक्सरसाइज और हेल्दी फैट्स को शामिल किया जाए, तो कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कंट्रोल में रखा जा सकता है और दिल की बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बात करें कोलेस्ट्रॉल की तो ये शरीर का मेंटेनेंस इंजीनियर की तरह काम करता है। जैसे बाइक या कार को स्मूद चलाने के लिए इंजन ऑयल की जरूरत होती है, वैसे ही शरीर को भी थोड़ी मात्रा में कोलेस्ट्रॉल चाहिए होता है। कोलेस्ट्रॉल शरीर की रिपेयरिंग, हॉर्मोन बनाने, और सेल्स को मजबूत रखने में मदद करता है। यानी कोलेस्ट्रॉल अपने आप में कोई समस्या नहीं है। दिक्कत तब होती है जब इसकी मात्रा ज्यादा हो जाती है और यह धीरे-धीरे ब्लड वेसल्स में जमा होने लगता है, जिससे खून का फ्लो स्लो हो जाता है।

कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है एक गुड कोलेस्ट्रॉल जिसे HDL और दूसरा खराब कोलेस्ट्रॉल जिसे LDL कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। LDL की अधिकता धमनियों की दीवारों में प्लाक (fatty deposits) जमा करती है। यह धमनियों को संकुचित कर देती है, जिससे दिल का दौरा और स्ट्रोक का गंभीर खतरा बढ़ जाता है।

ट्राइग्लिसराइड्स क्या होते हैं?

ट्राइग्लिसराइड्स को आप शरीर का एनर्जी सेविंग अकाउंट कह सकते हैं। जब हम खाना खाते हैं, तो उससे एनर्जी मिलती है। जितनी एनर्जी शरीर इस्तेमाल कर लेता है, वह खर्च हो जाती है और जो एक्स्ट्रा बचती है, उसे शरीर भविष्य के लिए स्टोर कर लेता है। इस स्टोर की गई एनर्जी को ही ट्राइग्लिसराइड्स कहा जाता है। ज्यादा मीठा, ज्यादा कार्ब्स और ओवरईटिंग करने से ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने लगते हैं जो दिल के रोगों का मुख्य कारण बन सकता है। जब एक्स्ट्रा कैलोरी शरीर में वसा के रूप में स्टोर हो जाती है तो मोटापा, डायबिटीज और फैटी लिवर का खतरा बढ़ने लगता है।

Dr. Bhushan Research Lab के संस्थापक डॉक्टर भूषण जो  Ayurveda और साइंस-बेस्ड हेल्थ तरीके से बीमारियों का समाधान बताते हैं, ने कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड कंट्रोल करने का एक आसान साइंस-बेस्ड घरेलू फार्मूला बताया है। दही के साथ ओट्स, अलसी के बीज और सिगार वाली दालचीनी मिक्स करके सुबह के नाश्ते में या फिर शाम के नाश्ते में खाएं तो आप आसानी से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड को कंट्रोल कर सकते हैं। दही के साथ ये तीनों चीजों का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहता है। शुगर क्रेविंग कंट्रोल रहती है। एक्स्ट्रा शुगर और कार्ब्स को कंट्रोल करने में ये नुस्खा बेहद मददगार साबित होता है। इसे रोज खाने से ट्राइग्लिसराइड्स के रूट कॉज पर वार होता है।

ओट्स कैसे चर्बी सोखने वाला स्पंज होता है साबित

ओट्स में बीटा-ग्लूकॉन नामक एक घुलनशील फाइबर होता है जो कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में मददगार साबित होता है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन के अनुसार, बीटा-ग्लूकॉन पेट में जाकर एक गाढ़ा जेल बनाता है। यह जेल नसों में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को अपने साथ चिपका लेता है और शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। ये कोलेस्ट्रॉल को खून में सोखने से रोकता है।

अलसी के बीज (Flaxseeds) करते हैं नसों की मरम्मत

अलसी में अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) होता है, जो एक प्रकार का ओमेगा-3 फैटी एसिड है। जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित अध्ययन बताते हैं कि अलसी के लिग्नांस धमनियों (Arteries) में प्लाक यानी गंदी चर्बी को जमने से रोकते हैं। ये ट्राईग्लिसराइड्स को कम करता है और नसों के लचीलेपन को बढ़ाता है।

सिगार वाली दालचीनी इंसुलिन और लिपिड में करती है सुधार

सिगार वाली दालचीनी सबसे शुद्ध और सुरक्षित मानी जाती है। दालचीनी में सिनेमा डिहाइड (Cinnamaldehyde) होता है। रिसर्च बताती है कि यह एंजाइम की गतिविधियों को कंट्रोल करके शरीर में फैट स्टोरेज को कम करती है। ये न केवल ट्राइग्लिसराइड को कम करती है, बल्कि ब्लड शुगर को भी नॉर्मल रखती है, जिससे शरीर में नया फैट नहीं बनता।

दही प्रोबायोटिक्स का है पावर हाउस

दही में मौजूद गुड बैक्टीरिया का सीधा संबंध हार्ट हेल्थ से है। कुछ क्लिनिकल स्टडी मानती हैं कि दही के बैक्टीरिया लिवर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं। ये पाचन में सुधार करती है जिससे फाइबर का असर दोगुना हो जाता है।

दही के साथ ओट्स, अलसी के बीज और सिगार वाली दालचीनी का कैसे सेवन करें

सामग्री:

ओट्स – 2 चम्मच
दही – 4 से 5 चम्मच
अलसी हल्की पिसी हुई – 1 चम्मच
सिगार वाली दालचीनी एक चुटकी  

इन सभी चीजों को अच्छे से मिक्स करें और 5 मिनट के लिए छोड़ दें। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें सेब या पपीता का 1–2 चम्मच मिलाया जा सकता है। रोज़ाना लगभग 50–60 ग्राम ड्राई दलिया नाश्ते या इवनिंग स्नैक में लिया जा सकता है। बेहतर है कि इसे पानी में पकाकर खाएं। जिन लोगों को ज्यादा समस्या नहीं है, वे कभी-कभी दूध वाला दलिया भी ले सकते हैं।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

रात में सोते-सोते पेशाब के लिए भागते हैं और यूरिन हो जाता है लीक, ये 2 चीजें बिना दवा रोकेंगी मूत्र रिसाव, डॉक्टर ने बताया नुस्खा। पूरी जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें।