साल 2020 का पहला चंद्र ग्रहण 10 जनवरी को लगने जा रहा है। इस ग्रहण का प्रारंभ रात 10 बजकर 39 मिनट पर होगा और इसकी समाप्ति देर रात 2 बजकर 20 मिनट पर होगी। चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे के आस पास की रहेगी। ये ग्रहण भारत के अलावा यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कई भागों में दिखाई देगा। साल 2020 में कुल 6 ग्रहण लगने हैं। जिनमें 4 चंद्र ग्रहण और 2 सूर्य ग्रहण होंगे।
चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं: हिंदू धर्म में चंद्रग्रहण लगने के पीछे राहु केतु होते हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और दानवों के बीच अमृत पाने को लेकर घमासान चल रहा था। अमृत को देवताओं को पिलाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नाम की सुंदर कन्या का रूप धारण किया और सभी में अमृत बराबर बराबर बांटने के लिए राजी कर लिया। जब मोहिनी का रूप लिए भगवान विष्णु अमृत को लेकर देवताओं के पास पहुंचे और उन्हें पिलाने लगे तो राहु नामक असुर भी देवताओं के बीच जाकर बैठ गया। जिससे अमृत उसे भी मिल जाए। जैसे ही वो अमृत पीकर हटा, भगवान सूर्य और चंद्रमा को इस बात की भनक हो गई कि वह असुर है और ये बात उन्होंने भगवान विष्णु को बता दी। विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी। क्योंकि वो अमृत पी चुका था इसीलिए वह मरा नहीं। उसका सिर और धड़ राहु और केतु नाम से जाना गया। ऐसी मान्यता है कि इसी घटना के कारण राहु केतु सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगाते हैं।
चंद्र ग्रहण को लेकर वैज्ञानिक कारण: विज्ञान अनुसार पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और चंद्रमा पृथ्वी की। इस प्रक्रिया के दौरान कई बार पृथ्वी सूर्य व चंद्रमा के बीच में आ जाती है जिस कारण चंद्रमा पृथ्वी की छाया से छिप जाता है और चंद्रमा पर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ पाती। इसी घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इसी तरह जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है तब सूर्य ग्रहण का नजारा देखने को मिलता है। आमतौर पर चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन तो सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन लगता है।
साल 2020 का वार्षिक राशिफल पढ़ें यहां…
मेष (Aries ) | वृषभ (Taurus) | मिथुन (Gemini) | कर्क (Cancer) | सिंह (Leo) | कन्या (Virgo) | तुला (Libra) | वृश्चिक (Scorpio) | धनु (Sagittarius) | मकर (Capricorn) | कुंभ (Aquarius) | मीन (Pisces)
