हस्तरेखा विज्ञान में हाथ की रेखाओं के आधार पर बड़ी ही दिलचस्प जानकारियां दी गई हैं। हाथ की रेखाओं के जरिए व्यक्ति के स्वभाव और उसके भविष्य के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। अक्सर लोग जानना चाहते हैं कि उनकी कितनी संतान होंगी? या फिर भविष्य में उन्हें संतान सुख की प्राप्त होगी या नहीं? संतान से जुड़े हर सवाल का जवाब हाथों की रेखाओं को देखकर दिया जा सकता है।
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ की सबसे छोटी उंगली कनिष्ठिका के नीचे बुध पर्वत होता है। बुध पर्वत पर मौजूद खड़ी रेखा संतान रेखा कहलाती है। यह रेखा स्पष्ट होनी चाहिए। आपके हाथ में जिनती संतान रेखा होंगी, भविष्य में आपके उतने ही बच्चे होंगे। बता दें कि संतान का विचार शुक्र पर्वत पर स्थित रेखाओं से भी किया जाता है। वहीं हथेली के बाहर की ओर से भीतर आने वाली हॉरिजेंटल लाइन विवाह रेखा कहलाती है।
हस्तरेखा विज्ञान में संतान संख्या के अलावा संतान के पुत्र या पुत्री होने का भी आंकलन किया गया है। हस्तरेखा की मानें तो बुध और शुक्र पर्वत पर बनने वाली छोटी-छोटी गहरी रेखाएं पुत्र प्राप्ति का संकेत देती हैं। इसके अलावा यदि ये रेखाएं हल्की हों तो आपको लक्ष्मी यानी पुत्री की प्राप्ति हो सकती है।
संतान रेखा पर तिल: अगर आपके हाथ में मौजूद संतान रेखा पर तिल है तो इसका अर्थ ही की आपको संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न हो सकती है। अगर किसी की हथेली में संतान रेखा कटी-फटी है तो ऐसा व्यक्ति संतान सुख से वंचित रह जाता है।
द्वीप का चिन्ह: अगर किसी व्यक्ति की हथेली में संतान रेखा पर द्वीप का चिन्ह है तो ऐसे लोगों की संतान का स्वास्थ्य हमेशा कमजोर रहता है। वहीं अगर संतान रेखा पर लाल तिल मौजूद है तो यह संतान के कमजोर स्वास्थ्य और अल्पायु होने का संकेत होता है।
इसके साथ ही जिन लोगों का बुध पर्वत उभरा हुआ होता है उनकी चार संतानें होने की मान्यता होती है। वहीं जिन लोगों का शुक्र पर्वत उभरा हुआ होता है उन्हें एक संतान प्राप्त होने की मान्यता है।
