Religion

विचार बोध: राम रमैया घट-घट वासी

कबीर की भाषा और शैली बहुधा प्रत्याख्यान के रूप में सामने आती है तो राम के बारे में बताते हुए भी वे इसी तेवर में दिखते हैं। कबीर कहते हैं, “दसरथ सुत तिहुं लोक बखाना, राम नाम का मरम है आना।” यानी दशरथ के बेटे राम को तो सभी भजते हैं, लेकिन राम नाम का मरम तो कुछ और ही है।

चौपाल: प्रेम की जगह

जीवन साथी का अर्थ ही होता है ऐसे व्यक्ति का चुनाव करना जो जीवन भर हर परिस्थिति में अपनी संगिनी का साथ दे। पिछले कुछ समय से ‘लव जिहाद’ की खबरें जोरों पर हैं। असल में यह शब्द ही गलत है। जबर्दस्ती केवल एक तरफ से या केवल एक धर्म में नहीं होती।

ज्ञान सागर: जहां धर्म, वहां ओज एवं जय

अकसर कुछ लोग इसलिए भी धर्म की उपेक्षा करते हैं कि उन्हें सच्चे धर्म का बोध नहीं है और वे पंथों, मजहबों द्वारा स्वार्थ के लिए फैलाए गए क्रियाकलापों को धर्म मानते हैं। अत: धर्म का वास्तविक सार्वभौम एवं विश्वमानव के लिए हितकारी समान स्वरूप को समझने की आवश्यकता है। हमें धर्म के लक्षणों को देखना चाहिए।

जीवन-जगत: अपने दिल की खिड़की खोलिए

‘हमें लाभ हो’ के भाव को त्यागकर धीरे-धीरे हम सोचने लगते हैं कि ‘सिर्फ हमें ही लाभ हो’। जब हम स्वयं पर केंद्रित हो जाते हैं तो बहुत सारी समस्याएं पैदा होती हैं। सभी समस्याओं को खत्म करने के लिए हमें अपने दिल की खिड़कियां खोलनी ही होंगी।

शुभ मुहूर्त: देवउठनी एकादशी से मंगल कार्य आरंभ

एकादशी तिथि का प्रारंभ 25 नवंबर 2020 बुधवार सुबह 2 बजकर 42 मिनट से होगा और एकादशी तिथि की समाप्ति 26 नवंबर 2020 गुरुवार सुबह 5 बजकर 10 मिनट पर होगी।

दीपोत्सव: जगमग-जगमग दीप जले

वेद कहते हैं कि माता लक्ष्मी सुखी दांपत्य, स्वादिष्ट अन्न, लहलहाती फसल तथा गोमाता से जुड़ी है। इसलिए यह मानकर लक्ष्मी की आराधना होनी चाहिए कि लक्ष्मी का संबंध धन से नहीं वरन चरित्र और धन की पवित्रता से है।

दीपोत्सव: पादुका प्रशासन से मुक्ति

यह अच्छा है कि श्रीराम की अयोध्या उनके वनवास के 14 सालों में बदली नहीं वरना उसे देखकर श्रीराम की आंखें नम हो जाती। वे अपनी अयोध्या को ही नहीं पहचान पाते! लेकिन अयोध्या में चहुं ओर प्रकाश ही प्रकाश है। अंधेरे के लिए कहीं कोई गुंजाइश नहीं है। क्या राम की दीपावली की किरणें आज की किरणों से मेल खा रही हैं?

दीपोत्सव: संस्कृति का उजास

पौराणिक काल में पूरे कार्तिक महीने में दीपदान की शास्त्र विधि शुरू हुई। आकाशदीप के रूप में बांस के सहारे ऊंचाई पर दीप जलाने की परंपरा चल पड़ी। इस धार्मिक भावना का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन काल दीपावली है, जब चारों ओर अनगिनत दीप जगमगाते हैं।

तीज-त्योहार: बंगाल, ओड़ीशा और असम में काली पूजा का महत्व

बंगाल में कार्तिक अमावस्या की आधी रात को मां काली की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां काली की विधिवत आराधना हमारे शरीर की शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आध्यात्मिक और ऊर्जा के स्तरों को संतुलित कर देती हैं। यही पांच ऊर्जाएं अगर संतुलित न हों तो मनुष्य के जीवन में उथल-पुथल मचा देती हैं। लेकिन क्या सिर्फ पूजा से ही ये ऊर्जाएं नियंत्रित हो सकती हैं? उत्तर है- नहीं। इसके लिए साधना की विशेष पद्धतियां बताई गई हैं, जिसका सार्वजनिक उल्लेख वर्जित माना गया है।

अभूतपूर्व: पंचोत्सव सिमट रहे हैं चार दिन में

श्राद्ध के अगले दिन आरंभ होने वाला नवरात्र एक महीना आगे खिसक गया। चौमासा पंचमासा में बदल गया तो दिवाली के पंच पर्व चार दिवसीय हो गए हैं।

जीवन जगत: जीवन का बस एक ही मकसद हो…आनंद

कई बार ऐसा जीवन में महसूस किया जाता है कि बहुत सी चीजें हम फिजूल ही करते आए हैं और अपना जीवन जटिल कर लेते हैं। जैसे ही उस चीज को या उस कार्य को हम छोड़ते हैं, तो जीवन आसान हो जाता है।

पंचपर्व: दीपोत्सव…पंचोत्सव

पांच दिन तक चलने वाला दीपोत्सव ‘पंचपर्व’ कहलाता है। इन पांच दिनों में भिन्न-भिन्न देवताओं का पूजन होता है। दीपावली से एक दिन पहले चतुर्दशी तिथि को भगवान विष्णु ने माता अदिति के आभूषण चुराकर ले जाने वाले निशाचर नरकासुर का वध किया था।

विचार बोध: धर्म दर्शन और मानवता

धर्म के संबंध में जिस कसौटी की बात बीसवीं सदी में महात्मा गांधी करते हैं, उस कसौटी की चर्चा उनसे बहुत पहले सुकरात के यहां एक तार्किक टेक के तौर पर मिलती है। सुकरात का मानना था कि किसी भी बात को आंख मूंदकर न मानो, पहले तर्क के साथ विचार करो।

Karwa Chauth 2020 Date: कब है करवा चौथ? जानिये इससे जुड़ी मान्यताएं और मुहूर्त

Karwa Chauth (Karva Chauth) 2020 Date in India: प्राचीन काल से ही करवा चौथ के व्रत का बहुत अधिक महत्व बताया जाता है। इस साल करवा चौथ 4 नवम्बर, बुधवार को मनाया जाएगा।

व्रत-त्योहार: पापों को हरने का दिन पापांकुशा एकादशी

पापांकुशा एकादशी का विधि विधान से व्रत और पारण किए जाने से शरीर तथा आत्मा शुद्ध रहते हैं। यह एकादशी अपार धन, समृद्धि और सुख देती है।

आस्था-औषधि: शरद पूर्णिमा की रात का धार्मिक व औषधीय महत्व

शोध के अनुसार खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। हल्दी का उपयोग निषिद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। रात्रि 10 से 12 बजे तक का समय उपयुक्त रहता है।

वक्‍त की नब्‍ज: बुनियादी उसूल और उसूलों की बुनियाद

देश के अधिकतर लोग इन झगड़ों से आगे निकल चुके हैं। यह इन दिनों बिहार के चुनावों में देखने को मिलता है। आम लोगों से जब पूछा जाता है कि उनकी राय में इस बार सबसे बड़ा मुद्दा क्या है, तो बेझिझक सब कहते हैं कि एक ही मुद्दा है और वह है बेरोजगारी।

साधु-संत: महावतार बाबाजी की दिव्यता

स्वामी केवलानंद हिमालय में महावतार बाबाजी के साथ कुछ समय रहे थे। उन्होंने बताया है कि बाबाजी अपने शिष्यों के साथ पर्वतों में एक स्थान से दूसरे स्थान को भ्रमण करते रहते हैं। उनकी छोटी सी शिष्य मंडली में दो अत्यंत उन्नत अमेरिकी शिष्य भी हैं। किसी स्थान पर कुछ समय बिताने के बाद बाबाजी कहते हैं- ‘डेरा डंडा उठाओ’। वे अपने पास एक डंडा रखते हैं। उनका यह आदेश अपनी मंडली के साथ तत्क्षण किसी दूसरे स्थान पर पहुंचने का संकेत होता है।

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