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हथेली की इन रेखाओं से संतान संख्या तय होने की है मान्यता

हस्तरेखा विज्ञान में हाथ के अंगूठे के निचले हिस्से को शुक्र पर्वत कहा जाता है। और शुक्र पर्वत पर बनने वाली छोटी-छोटी रेखाओं के आधार पर संतान संख्या निर्धारित होती है।

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सांकेतिक तस्वीर।
हस्तरेखा विज्ञान में हथेली की रेखाओं के आधार पर बड़ी ही दिलचस्प जानकारियां दी गई हैं। इन जानकारियों से व्यक्ति के स्वभाव और उसके भविष्य के बारे में काफी कुछ मालूम किया जा सकता है। आज हम हथेली की उन रेखाओं के बारे में बात करने वाले हैं जिनसे व्यक्ति की होने वाली कुल संतानों की संख्या जानी जा सकती है। जी हां, हस्तरेखा विज्ञान की मानें तो व्यक्ति की हथेली पर कुछ ऐसी रेखाएं होती हैं जिनसे उसकी होने वाली संतानों के बारे में पता लगाया जा सकता है। बता दें कि छोटी अंगुली के निचले हिस्से के स्थान को बुध पर्वत कहा जाता है। और ज्योतिष में बुध पर्वत पर बनने वाली रेखाओं के आधार पर व्यक्ति के संतान सुख के बारे में पता चलता है।

हस्तरेखा के मुताबिक आपकी की हथेली के बुध पर पर्वत पर जितनी खड़ी रेखाएं होंगी, आपकी उतनी ही संतान संख्या होगी। मालूम हो कि हस्तरेखा विज्ञान में हाथ के अंगूठे के निचले हिस्से को शुक्र पर्वत कहा जाता है। और शुक्र पर्वत पर बनने वाली छोटी-छोटी रेखाओं के आधार पर संतान संख्या निर्धारित होती है। जानना दिलचस्प है कि बुध और शुक्र पर्वत की इन छोटी-छोटी रेखाओं को हस्तरेखा ज्ञान में संतान रेखा के नाम से जाना जाता है।

संतान संख्या के अलावा हस्तरेखा विज्ञान में संतान के पुत्र या पुत्री होने का भी आंकलन किया गया है। हस्तरेखा की मानें तो बुध और शुक्र पर्वत पर बनने वाली छोटी-छोटी गहरी रेखाएं पुत्र प्राप्ति का संकेत देती हैं। इसके अलावा यदि ये रेखाएं हल्की हों तो आपको लक्ष्मी यानी पुत्री की प्राप्ति हो सकती है। इसके साथ ही जिन लोगों का बुध पर्वत उभरा हुआ होता है उनकी चार संतानें होने की मान्यता है। वहीं जिन लोगों का शुक्र पर्वत उभरा हुआ होता है उन्हें एक संतान होने की मान्यता है।

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