अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहरा दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में इस कार्यक्रम को संपन्न किया गया। इस ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए कई लोगों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इकबाल अंसारी को लेकर हो रही है।
इकबाल अंसारी वही शख्स हैं, जो कई सालों तक बाबरी मस्जिद के पक्ष में कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। जब मामला अदालत में लंबित था, वे हर तारीख पर कचहरी जाया करते थे। ऐसे मौके भी आए जब उन्होंने राम मंदिर के खिलाफ कड़े बयान दिए। लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया, तो इकबाल अंसारी ने सबसे पहले खुशी जताई। उनका कहना था कि उन्हें तसल्ली है कि दशकों पुराना विवाद अब समाप्त हो गया।
अब इकबाल अंसारी ने राम मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर भी अपनी प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुशकिस्मती है कि मंदिर निर्माण के बाद उन्हें ध्वजारोहण करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, “हमें नहीं भूलना चाहिए कि अयोध्या भगवान की धरती है। यहां सभी खुश हैं और मिलकर रहते हैं। कभी मैंने संघर्ष किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हमने इसे स्वीकार किया। इतिहास पर ज्यादा बोलना नहीं चाहता, लेकिन इतना कहना चाहूँगा कि अभी सरकार अच्छी चल रही है और आगे भी ऐसी ही रहनी चाहिए।”
वैसे इकबाल अंसारी को इससे पहले प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी बुलाया गया था, और तब भी उन्होंने इसी तरह अपनी खुशी जाहिर की थी। इकबाल अंसारी के अलावा धर्म ध्वज कार्यक्रम में एनबीआरआई लखनऊ के वैज्ञानिक डॉक्टर मृदुल को भी बुलाया गया था। वे तीन दशक पहले तक अयोध्या में गठित हुई इस्लामीकरण विरोधी सेना के कमांडर हुआ करते थे। 1997 तक यह संगठन सक्रिय रूप से काम करता रहा था।
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