रोहित वेमुला की आत्महत्या को 10 साल पूरे हो गए। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री एमबी विक्रमार्क ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्य में रोहित वेमुला अधिनियम बनाकर इसे लागू किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले दिन में हैदराबाद विश्वविद्यालय (UOH) के छात्रों के एक समूह ने रोहित वेमुला की आत्महत्या के दस साल पूरे होने पर कक्षाओं का बहिष्कार किया और विश्वविद्यालय परिसर में एक मार्च निकाला।
वेमुला ने की थी आत्महत्या
रोहित वेमुला ने 17 जनवरी 2016 को हैदराबाद विश्वविद्यालय के परिसर में एक छात्रावास के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। रोहित वेमुला द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। एक आधिकारिक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क ने प्रजा भवन में ‘जस्टिस फॉर रोहित वेमुला कैंपेन कमेटी’ के सदस्यों से मुलाकात की और याद दिलाया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर राज्य में रोहित वेमुला अधिनियम लागू करने का आग्रह किया था।
राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस सरकारें इस कानून को जल्द से जल्द लागू करने की प्रक्रिया में हैं। उपमुख्यमंत्री ने कमेटी को सूचित किया कि कांग्रेस सरकार मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद रोहित वेमुला अधिनियम को लागू करने की दिशा में काम करेगी।
रोहित वेमुला आत्महत्या मामले की जांच को लेकर आया कांग्रेस का बड़ा बयान
क्या होगा एक्ट में?
कर्नाटक के अंबेडकरवादी स्काॅलर्स द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावित अधिनियम का उद्देश्य दलित समुदायों के लिए न्याय सुनिश्चित करते हुए भेदभाव-विरोधी उपायों को कानूनी रूप से लागू करना है। अभियान समिति ने इसका ड्राफ्ट उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क को सौंपा, जिन्होंने कानून को अंतिम रूप देने के लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के साथ चर्चा का वादा किया। अभियान में वेमुला मामले से जुड़े छात्रों के खिलाफ लंबित कानूनी कार्रवाइयों को भी संबोधित करने की मांग की गई है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
शनिवार सुबह राहुल ने X पर लिखा, “आज रोहित वेमुला को गए 10 साल हो गए। लेकिन रोहित का सवाल आज भी हमारे सीने में धड़क रहा है। क्या इस देश में सपने देखने का हक़ सबको बराबर है? रोहित पढ़ना चाहता था, लिखना चाहता था। विज्ञान, समाज और इंसानियत को समझकर इस मुल्क को बेहतर बनाना चाहता था। लेकिन इस व्यवस्था को एक दलित का आगे बढ़ना मंज़ूर नहीं था। संस्थागत जातिवाद, सामाजिक बहिष्कार, रोज़-रोज़ की बेइज़्ज़ती, औक़ात दिखाने वाली भाषा और अमानवीय व्यवहार – यही वह ज़हर था जिसने एक होनहार युवा को उस मुक़ाम तक धकेल दिया जहां उसकी गरिमा छीन ली गई और उसे अकेला कर दिया गया। और आज?”
राहुल ने आगे लिखा, “दलित युवाओं की हक़ीक़त क्या बदली है? कैंपस में वही तिरस्कार, हॉस्टल में वही अलगाव, क्लास में वही कमतर समझना, फिर वही हिंसा – और कभी-कभी वही मौत। क्योंकि जाति आज भी इस देश का सबसे बड़ा एडमिशन फ़ॉर्म है। इसीलिए रोहित वेमुला एक्ट कोई नारा नहीं, एक जरूरत है। ताकि शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव अपराध बने, दोषियों पर सख़्त कार्रवाई हो, और किसी भी छात्र को उसकी जाति के नाम पर तोड़ने, चुप कराने और बाहर करने की छूट खत्म हो। यह लड़ाई सिर्फ संसद की नहीं है। यह लड़ाई कैंपस की है, युवाओं की है, हमारी है। दलित युवाओं – आवाज उठाओ, संगठन बनाओ, एक-दूसरे के साथ खड़े रहो। मांग करो: रोहित वेमुला एक्ट अभी लागू करो। एंटी-डिस्क्रिमिनेशन क़ानून अभी चाहिए। कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की सरकारें इस कानून को जल्द से जल्द लागू करने की प्रक्रिया में हैं। हम एक ऐसा भारत चाहते हैं जो न्यायपूर्ण, मानवीय और समान हो – जहाँ किसी दलित छात्र को अपने सपनों की कीमत अपनी जान से न चुकानी पड़े। रोहित, तुम्हारी लड़ाई हमारी ज़िम्मेदारी है।”
