NEET Aspirant Death: बिहार की राजधानी पटना में एक नीट की 17 साल की छात्रा की मौत को लेकर उसके परिवारवालों ने साजिश की आशंका जताई है। छात्रा हॉस्टल के कमरे में बेहोश पाई गई थी। उसे अस्पताल ले जाया गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजन के संदेह के विपरीत पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया है।
मृतक छात्रा मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले की रहने वाली थी। उसके चाचा ने बताया कि उसने पिछले साल NEET पहले ही प्रयास में पास कर ली थी, लेकिन एमबीबीएस में सिर्फ दो अंकों से सीट पाने से चूक गई। हालांकि उसे बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी में सीट मिल गई, लेकिन उसने इसे छोड़कर दोबारा परीक्षा देने की तैयारी करने का फैसला किया।
पुलिस ने किया SIT का गठन
छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहा गया कि बल प्रयोग या यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। छात्रा के चाचा ने बताया कि वह NEET की तैयारी के लिए 2024 के अंत में पटना आई थी और तब से वहीं एक हॉस्टल में रह रही थी। साल के अंत के त्योहारों के दौरान, उसकी मां उससे मिलने आई और घर का बना खाना लाई।
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छात्रा के चाचा ने बताया कि चूंकि त्योहारों का मौसम था और नया साल नजदीक आ रहा था, इसलिए उसकी मां ने उसे घर आने के लिए जोर दिया और वे 26 दिसंबर को जहानाबाद गई थी। उसका पूरा फोकस अपनी पढ़ाई पर था। उसने 4 जनवरी को अपनी मां को बताया कि वह अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करना चाहती है और वापस जाना चाहती है।
5 जनवरी को उसके माता-पिता उसे जहानाबाद कोर्ट रेलवे स्टेशन तक छोड़ने गए, जहाँ से उसने दोपहर लगभग 1 बजे पटना जाने वाली ट्रेन पकड़ी। वह दोपहर 3 बजे तक पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन पहुंच गई और बाद में रात लगभग 9 बजे अपने पिता से बात की। उसके चाचा ने बताया, “उसने उन्हें बताया था कि वह हॉस्टल सुरक्षित पहुंच गई है और रास्ते में उसकी मुलाकात एक और लड़की से हुई थी। इसके ठीक एक दिन बाद वह अपने हॉस्टल के कमरे में बेहोश पाई गई।
परिवारवालों ने क्यों जताया संदेह?
छात्रा के परिवारवालों का मनाना है कि रेलवे स्टेशन से हॉस्टल पहुंचने के बाद वह बाहर नहीं निकली। चाचा ने कहा, “अगर वह बाहर गई होती, तो हॉस्टल रजिस्टर में उसका रिकॉर्ड होता लेकिन वहां कोई रिकॉर्ड नहीं है। पुलिस के अनुसार, लड़की को पहले स्थानीय क्लिनिक ले जाया गया और फिर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत बिगड़ने पर उसके परिवार ने उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया। 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
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इस घटना को लेकर पटना शहर के एसपी (पूर्व) परिचय कुमार ने कहा था कि अस्पताल में भर्ती होने के पहले दिन उसकी जांच करने वाले एक निजी स्त्री रोग विशेषज्ञ को यौन उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं मिला था। उन्होंने यह भी कहा था कि छात्रावास के सीसीटीवी फुटेज में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं दिखी और लड़की की यूरिन रिपोर्ट में नींद की गोलियों के सेवन की पुष्टि हुई। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि उसके कमरे से गोलियां बरामद की गई थीं।
नींद की गोली लेने के दावे खारिज
हालांकि, परिवार ने इन दावों को खारिज कर दिया। छात्रा के चाचा ने कहा कि पुलिस कह रही है कि उसने नींद की गोलियों का ओवरडोज ले लिया। वह 18 साल की भी नहीं थी! उसका कोई मेडिकल इतिहास नहीं था और उसे कोई दवा नहीं दी गई थी। एक नाबालिग बिना प्रिस्क्रिप्शन के इतनी सारी नींद की गोलियां कैसे प्राप्त कर सकती है?
उसकी चाची ने कहा कि वे कह रहे हैं कि वह अवसादग्रस्त थी। उसने पहले NEET परीक्षा पास कर ली थी और इस बार MBBS में सीट मिलने को लेकर आश्वस्त थी। हाल ही में घर आने के दौरान उसने परिवार के साथ नियमित रूप से तस्वीरें भेजी थीं। वह बिल्कुल भी अवसादग्रस्त नहीं लग रही थी।
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परिवार ने हॉस्टल के घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए। हॉस्टल के कर्मचारियों ने कथित तौर पर बताया कि कमरे का दरवाजा तोड़ना पड़ा था। एक अन्य चाचा ने पूछा कि जब मैं हॉस्टल पहुंचा, तो वहां जबरन घुसने का कोई निशान नहीं था। उन्होंने कहा कि दरवाजा पहले ही ठीक कर दिया गया था। अगर ऐसा था, तो उसे ठीक करने की इतनी जल्दी क्यों थी? कमरा साफ था। जांच के बीच में कोई ऐसा कैसे कर सकता है?
गुरुवार को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि “यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता”। परिवार ने बताया कि वे गुरुवार को सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट लेने के लिए पुलिस स्टेशन गए थे, लेकिन उन्हें रिपोर्ट रात करीब 8 बजे मिली। गुरुवार को जारी एक आधिकारिक पुलिस नोट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद चिकित्सक की राय में आए बदलाव को स्वीकार किया गया।
छात्रा के पिता ने जताई यौन उत्पीड़न की आशंका
पुलिस ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्रावास भवन के मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया है। पुलिस ने कहा कि आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों पर निर्भर करेगी। 9 जनवरी को दर्ज की गई एफआईआर में, लड़की के पिता ने उसके शरीर और सिर पर चोट के निशान का हवाला देते हुए यौन उत्पीड़न की आशंका व्यक्त की थी।
परिवार ने शुक्रवार को हॉस्टल संचालक और मालिक पर घटना को आत्महत्या के रूप में चित्रित करने का आरोप लगाया और कहा कि मामले को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पैसे की पेशकश की गई थी। वह अपने परिवार में मंझली संतान थी। उसके पिता सरकारी कर्मचारी हैं। घर में कोई समस्या नहीं थी। वह आत्महत्या क्यों करेगी? उसकी चाची ने पूछा और आगे कहा कि उसके पिता ने हमेशा उसका साथ दिया। वह शुरू से ही पढ़ाई में बहुत अच्छी थी।
परिवार ने बताया कि 8 जनवरी को बच्ची को कुछ देर के लिए होश आया था। चाची ने कहा कि वह वेंटिलेटर पर थी और बोल नहीं पा रही थी लेकिन जब उसने अपनी मां को देखा तो उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। जब उसकी मां ने उससे पूछा कि क्या उसके साथ कुछ गलत हुआ है, तो उसने हां में सिर हिलाया।
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छात्रा की मौत पर राजनीतिक विवाद
छात्रा की मृत्यु के बाद उनके परिवार और समर्थकों ने पटना में विरोध प्रदर्शन किया और उनका शव भी वहां लेकर आए। बाद में पुलिस ने बल प्रयोग करके प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया और विरोध प्रदर्शन के संबंध में एक अलग मामला दर्ज किया। स्थानीय पुलिस पर अविश्वास जताते हुए परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की है।
इस बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को कहा कि उनकी हत्या में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि पुलिस ने घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन कर दिया है। डीजीपी खुद जांच की निगरानी कर रहे हैं। उनकी हत्या में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए नीतीश कुमार सरकार पर असंवेदनशील होने और “अपराधियों को संरक्षण देने” का आरोप लगाया। पूर्णिया से निर्दलीय लोकसभा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी सीबीआई जांच की मांग की और कहा कि उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है।
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