महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी ) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने रविवार को एक संयुक्त रैली की। इस दौरान दोनों चचेरे भाइयों ने भाजपा के हिंदुत्व को फर्जी बताते हुए कहा कि मुंबई पर मंडरा रहे खतरे के कारण वे राजनीतिक रूप से एकजुट हुए हैं। रैली में उद्धव और राज ने मराठी एकता को पुनर्जीवित करने की बात कही और भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया।
15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनाव से पहले मुंबई की इस अंतिम संयुक्त रैली में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्होंने और राज ठाकरे ने मराठी मानुष, हिंदुओं और महाराष्ट्र के लिए अपने मतभेदों को भुला दिया है। उन्होंने और राज ठाकरे ने खुद को मुंबई को बचाने के लिए एकमात्र विकल्प के रूप में पेश किया। मराठी वोट बैंक को साधते हुए राज ठाकरे ने कहा कि दोनों भाई इसलिए साथ आए हैं क्योंकि मुंबई एक गंभीर खतरे का सामना कर रही है।
ठाकरे भाइयों ने बताई मराठी एकता की जरूरत
राज ठाकरे ने मराठी मतदाताओं को चेतावनी देते हुए एकता की अपील की। उन्होंने कहा, “यह मराठी नागरिकों का आखिरी चुनाव है। अगर आप आज हार गए तो यह हमेशा के लिए एक बड़ी गलती साबित होगी। अगर अब कोई गलती की तो मुंबई की लड़ाई हमेशा के लिए हार जाएंगे। हमें लड़ना नहीं चाहिए। यही वे चाहते हैं । हमें उन्हें वह नहीं देना चाहिए जो वे चाहते हैं।”
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ठाकरे परिवार को उम्मीद है कि शहर में उनके पारंपरिक मराठी वोट बैंक को समर्थन मिलेगा। दोनों भाइयों का गठबंधन एक राजनीतिक रणनीति थी जिन्हें उम्मीद है कि ठाकरे परिवार के प्रति वोटर्स की पुरानी यादें शिवसेना के पारंपरिक मतदाताओं को इस नए गठबंधन के पीछे ला सकती हैं। खासकर उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विभाजन के बाद मराठी भाषी मतदाताओं में बार-बार फूट पड़ी है, जिससे मुंबई में दोनों भाइयों का राजनीतिक प्रभाव कमजोर हो गया है।
मुंबई को लूटने और इसे गुजरात से जोड़ने का प्रयास
दोनों नेताओं ने भाजपा पर मुंबई को लूटने और इसे गुजरात से जोड़ने का प्रयास करने का आरोप लगाया। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि 2014 में सत्ता में आने के बाद से भारतीय जनता पार्टी सरकार लगातार अडानी का पक्ष ले रही है। उन्होंने कहा, “दीर्घकालिक योजना मुंबई को गुजरात से जोड़ने की है। बीएमसी अगर हमारे पास रही तो वे अडानी को जमीन नहीं बेच पाएंगे।” राज ने इस आशंका को सबसे सीधे शब्दों में व्यक्त करते हुए कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र मराठी लोगों के हाथों में ही रहने चाहिए और इन्हें गुजरात को नहीं दिया जाना चाहिए।
उद्धव ने कहा, “हम महाराष्ट्र की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक साथ आए हैं और अपने मतभेदों को भुला दिया है। हम आप सभी को बता रहे हैं कि हम मुंबई क्यों जीतना चाहते हैं। हम प्रतिज्ञा लेते हैं कि हम इस मुंबई को टूटने नहीं देंगे, किसी को भी इसे तोड़ने नहीं देंगे और इसे झुकने नहीं देंगे।”
भाजपा पर लगाया धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप
दोनों नेताओं ने भाजपा पर शासन की बजाय ध्रुवीकरण पर निर्भर रहने का आरोप लगाया। चुनाव से पहले भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उद्धव ने कहा, “भाजपा का हिंदुत्व और राष्ट्रवाद नकली है।” उन्होंने कहा, “भाजपा एक ऐसी पार्टी बन गई है जो राष्ट्र को पहले रखने की बजाय भ्रष्टाचार को पहले रखती है। अगर देवेंद्र फड़नवीस एक भी ऐसा चुनाव दिखा सकें जिसमें उन्होंने हिंदू-मुस्लिम मुद्दे न उठाए हों तो मैं उन्हें एक लाख रुपये दूंगा।” उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि वे नागरिक समस्याओं पर बात करें।
इस आरोप का उद्देश्य धार्मिक और पहचान आधारित बहसों से ध्यान हटाकर सड़कों, आवास और सार्वजनिक सेवाओं जैसे रोजमर्रा के मुद्दों पर केंद्रित करना था, ऐसे मुद्दे जिनमें ठाकरे परिवार का मानना है कि भाजपा खुद को कमजोर महसूस कर सकती है।
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(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)
