बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष की करारी हार हुई थी। सबसे बड़ा झटका पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की पार्टी आरजेडी को लगा, जो 25 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं राजद नीत इंडिया गठबंधन को कुल 35 सीटों पर जीत हासिल हुई। भाजपा नीत एनडीए को 202 सीटें मिलीं। अब इसी साल अप्रैल में बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही है और इन पर चुनाव होना है। अप्रैल में राजद के सांसद प्रेमचन्द गुप्ता और एडी सिंह भी रिटायर हो रहे हैं।

मुश्किल में आरजेडी

दरअसल आरजेडी के पास इतने नंबर नहीं है कि वह एक भी सांसद राज्यसभा भेज सके। अगर महागठबंधन के भी सहयोगियों का पूरा समर्थन उन्हें मिल जाए, उसके बावजूद अपना एक सांसद जीताने के लिए तेजस्वी यादव को जोड़-तोड़ करनी पड़ेगी। वहीं एनडीए के लिए स्थिति बेहतर है। वह चार सीट आसानी से जीत जाएगी जबकि पांचवें के लिए वह लड़ाई करेगी।

किस दल के कितने सांसदों का कार्यकाल हो रहा खत्म?

अप्रैल में एनडीए के जेडीयू से हरिवंश और रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल खत्म हो रहा है तो वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है। यानी एनडीए से तीन सीट खाली हो रही है। जबकि आरजेडी के प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है। अभी तक इन पांच सीटों में से दो जेडीयू, दो आरजेडी और एक सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास थी।

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एक राज्यसभा के लिए 41 विधायकों का चाहिए समर्थन

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए एक सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। एनडीए के पास संख्या 202 है। ऐसे में उसके 4 उम्मीदवार आसानी से राज्यसभा पहुंच जाएंगे। जबकि पांचवें उम्मीदवार को जीतने के लिए उन्हें तीन अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। बची हुई पांचवी सीट के लिए आरजेडी जरूर उम्मीदवार उतारेगी क्योंकि महागठबंधन के पास विधायकों की संख्या 35 (आरजेडी 25, कांग्रेस 6, CPIML 2, IIP और CPI 1) है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पास 5 और बीएसपी का एक विधायक है, जो किसी गठबंधन में नहीं है।

बिहार में किस दल के पास कितने विधायक?

पार्टीकितने विधायक?
बीजेपी 89
जेडीयू85
हम(एस)5
राष्ट्रीय लोक मोर्चा4
एलजेपी (रामविलास)19
आरजेडी25
कांग्रेस6
IIP1
CPIML 2
CPI 1
AIMIM 5
BSP 1

तेजस्वी के लिए अग्निपरीक्षा

आंकड़ों के स्पष्ट है कि अगर महागठबंधन आरजेडी के संभावित उम्मीदवार को एकतरफ़ा समर्थन दे देगा तब भी उन्हें ओवैसी और बीएसपी का साथ चाहिए होगा। ऐसे में इस सीट के लिए घमासान जरूर होगा। वहीं एनडीए के पास भी 38 विधायक बचे होंगे, ऐसे में अगर वह पांचवा उम्मीदवार उतारती है तो उसे महज तीन विधायकों का समर्थन चाहिए होगा। आकंड़े बताते हैं कि बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव तेजस्वी के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे।

क्या नितिन नवीन की राज्यसभा में होगी एंट्री?

नितिन नवीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। उन्हें दिल्ली में संसद भवन के पास ही 9 सुनहरी बाग लेन बंगला भी आवंटित हो गया है। अब बड़ा सवाल उठता है की नितिन नवीन विधायक बने रहेंगे या फिर वह राज्यसभा जाएंगे? नितिन नवीन वर्तमान में पटना के बांकीपुर से पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं। माना जा रहा है कि बिहार में सभी पांच सीटों पर एनडीए लड़ेगी।

उपेंद्र कुशवाहा का क्या होगा?

एनडीए में दो जेडीयू, दो बीजेपी और एक सहयोगी दल को सीट दी जाएगी। सहयोगियों में उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान प्रमुख दावेदार हैं। उपेंद्र कुशवाहा अभी राज्यसभा सांसद हैं। वही चिराग भी एक राज्यसभा सीट के लिए जोर लगा रहे हैं। हालांकि उपेंद्र कुशवाहा को अगर राज्यसभा पर दावेदारी करनी है तो उन्हें पहले अपने चारों विधायकों का समर्थन चाहिए होगा। बताया जा रहा है कि उनकी पार्टी के तीन विधायक उनके बेटे को मंत्री बनाए जाने से नाराज चल रहे हैं। हालांकि तीनों विधायकों ने कहा है कि वह एनडीए का समर्थन करते हैं।

भले ही बिहार से किसी भी बीजेपी राज्यसभा सांसद का कार्यकाल नहीं खत्म हो रहा है लेकिन अगर बीजेपी चाहेगी कि नितिन नवीन को बिहार से ही राज्यसभा भेजा जाए तो वह आसानी से भेज सकती है। सूत्रों के अनुसार पार्टी नितिन नवीन का बिहार से कनेक्शन जोड़े रखना चाहती है। ऐसे में उसके पास दो ऑप्शन खुले हैं या तो नितिन नवीन विधायक बने रहे या फिर पार्टी उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजे। नितिन नवीन के पास झारखंड से भी ऑप्शन है। झारखंड से बीजेपी के सांसद दीपक प्रकाश का भी अप्रैल में कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में यहां से बीजेपी एक सांसद को राज्यसभा भेजेगी। नितिन नवीन का जन्म रांची में हुआ है। पढ़ें बीजेपी अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन के पहले भाषण की बड़ी बातें