बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस बात का श्रेय दिया जाता है कि करीब पाँच दशक तक सक्रिय राजनीति में रहने के बावजूद उन्होंने अपने परिवार को बढ़ावा नहीं दिया। नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार शपथ-ग्रहण समारोह में बिल्कुल सामान्य जनता की तरह नजर आए और उनके वीडियो और तस्वीरें वायरल हुए।
नीतीश कुमार के परिवार का कोई अन्य सदस्य भी सक्रिय राजनीति में नहीं है मगर गुरुवार को जब उन्होंने रिकॉर्ड 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली उसके बाद से ही परिवारवाद को संरक्षण देने को लेकर उन्हें विपक्ष घेर रहा है।
बिहार विधान सभा की की 243 सीटों में से 202 पर जीत हासिल करने के बाद नीतीश कुमार ने गरुवार को एनडीए विधायक दल के नेता के तौर पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ मंत्री पद की शपथ लेने वाले 26 मंत्रियों में से 10 का सम्बन्ध राजनीतिक परिवारों से है। मुख्य विपक्षी दल राजद ने भी इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है।
मोदी और नीतीश विपक्ष पर परिवारवाद का लगाते रहे हैं आरोप
बिहार चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद प्रमुख लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव पर परिवारवाद को बढ़ावा देने को लेकर लगातार हमला किया।
पीएम मोदी पिछले कई चुनावों से परिवारवाद को मुद्दा बनाते रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को ‘राजकुमार’ भी कहा था। पीएम मोदी नामदार बनाम कामदार का चुनाव होने को भी मुद्दा बनाते रहे हैं। पीएम मोदी राजनीतिक परिवारों से आने वाले नेताओं को नामदार कहते हैं और पहली पीढ़ी के नेताओं को कामदार कहते हैं।
पहली बार ‘कृपा’ से मुख्यमंत्री बने थे नीतीश कुमार, महज 7 दिन में ही गिर गई थी सरकार
बिहार की नवनिर्वाचित कैबिनेट मंत्रियों की सूची देखे तो 26 में से 10 मंत्री ऐसे हैं जो सीधे-सीधे राजनीतिक परिवार से आते हैं। जिसका उनको लाभ मिला है। इस सूची में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लेकर सबसे कम उम्र की मंत्री बनी श्रेयसी सिंह परिवारवाद की वजह से राजनीति में आईं हैं। इसको लेकर राजद ने भी नीतीश कुमार पर आरोप लगाया है।
आइए जानते हैं इन 10 मंत्रियों के बारे में –
1. बिहार की नई नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाए गए सम्राट चौधरी भी परिवारवाद की देन हैं। बीजेपी के टिकट पर तारापुर से विधायक बने सम्राट के पिता शकुनी चौधरी लालू यादव की सरकार में मंत्री रहे हैं, जबकि सम्राट की मां पार्वती देवी विधायक थीं।
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2. पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन मांझी को नीतीश सरकार में मंत्री बनाया गया है। वहीं संतोष मांझी की पत्नी दीपा मांझी इमामगंज से और उनकी सास ज्योति मांझी बाराचट्टी से जीतकर विधायक बनी हैं। संतोष विधान परिषद विधायक हैं। इसके अलावा सिकंदरा से विधायक बने प्रफुल्ल मांझी जीतन राम मांझी के दामाद हैं।
3. नीतीश सरकार में मंत्री बनाए गए दीपक प्रकाश को लेकर खूब चर्चा हो रही है। दीपक पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं। जबकि दीपक की मां स्नेहलता कुशवाहा सासाराम से विधायक चुनी गईं हैं। दीपक अभी विधानसभा या विधान परिषद किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।
4. नीतीश सरकार में सबसे कम उम्र की मंत्री बनीं श्रेयसी सिंह अंतरराष्ट्रीय शूटर रही हैं। बीजेपी के टिकट पर जमुई से दूसरी बार विधायक बनीं श्रेयसी पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की बेटी हैं।
5. बीजेपी के पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी रमा निषाद को भी नीतीश सरकार में मंत्री बनाया गया है। औराई से बीजेपी की विधायक बनीं रमा पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जय नारायण निषाद की पुत्रवधु हैं।
6. नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले विजय चौधरी को भी कैबिनेट में जगह मिली है। जेडीयू विधायक विजय चौधरी पूर्व विधायक जगदीश प्रसाद चौधरी का बेटे हैं।
सभी दलों के विधायक परिवारवादी
7. समस्तीपुर से सांसद शांभवी चौधरी के पिता अशोक चौधरी को भी नीतीश कैबिनेट में शामिल किया गया है। जदयू कोटे से विधान परिषद विधायक अशोक चौधरी बिहार के पूर्व मंत्री रहे महावीर चौधरी के बेटे हैं। अशोक चौधरी को सीएम नीतीश का करीबी माना जाता है।
8. बांकीपुर से बीजेपी से पांचवी बार विधायक बने नितिन नबीन को भी नीतीश सरकार में जगह मिली है। नबीन बीजेपी के बड़े नेता और पूर्व विधायक रहे नवीन किशोर सिन्हा के बेटे हैं।
9. गोपालगंज की भोरे से जेडीयू के विधायक बने अनिल कुमार भी नीतीश सरकार में मंत्री बने हैं। अनिल बिहार के पूर्व मंत्री रहे चन्द्रिका राम के बेटे हैं।
10. धमदाहा से छठीं बार जीतकर लेशी सिंह भी नीतीश सरकार में मंत्री बनीं हैं। लेशी के पति भूटन सिंह समता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष रहे हैं। लेशी को नीतीश का करीबी माना जाता है।
