भागलपुर प्रमंडल की 12 सीटों पर राजग का कब्जा होने के बावजूद मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। भागलपुर जिले की सात और बांका जिले की पांच सीटें इसमें शामिल है। जबकि एक समय था मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद, विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने वाले शिवचंद्र झा और सदानंद सिंह भागलपुर की धरती से ही निर्वाचित हुए। इसके बाद पांच बार अश्विनी चौबे जीते और मंत्री बने। दसवीं बार नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने और विभागों का बंटवारा हो गया, लेकिन भागलपुर से एक भी मंत्री नहीं बनाए जाने पर राजग कार्यकर्ताओं को ही खटक रहा है। कार्यकर्ताओं के अंदर इसका मलाल है।
बांका से पांचवीं दफा जीते रामनारायण मंडल भाजपा के कद्दावर नेता हैं। वे भूमि सुधार राजस्व मंत्री थे। जद (एकी) के बेलहर विधायक मनोज यादव है। वे दूसरी बार लगातार जीते हैं। सुलतानगंज से ललित मंडल भी जद (एकी) के टिकट पर दूसरी दफा जीते हैं। गोपालपुर से शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल भी जीते हैं।
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बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से तीसरी दफा विजय हुए शैलेंद्र कुमार (भाजपा) से हैं। यहां तक कि अमरपुर से दूसरी बार जीते जयंत राज को भी मंत्री नहीं बनाया गया। बिहार में विभिन्न स्थानों से जीत कर आए 19 मंत्रियों को अपना पद खोना पड़ा है, जबकि बिना जीत कर आए दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया गया। वे राज्यसभा सांसद और रालोमा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं। इस बार राजग ने प्रमंडल की 12 सीट जीत दर्ज की है।
भागलपुर की सात सीटों में से बिहपुर, भागलपुर और पीरपैंती सीट पर भाजपा का कमल खिला है। नाथनगर सीट लोजपा (रामविलास) के खाते में गई है। वहीं गोपालपुर, सुल्तानगंज, कहलगांव सीट जद (एकी) ने अपनी जीत दर्ज की। वहीं बांका जिले की कटोरिया, बांका सीट भाजपा और अमरपुर, धोरेया और बेलहर पर जद (एकी) का तीर निशान चला है। फिर भी भागलपुर प्रमंडल मंत्री पद के लिए तरस गया है। यह बात राजग कार्यकर्ता ही बोलते है।
