इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार (19 जुलाई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस लोकसभा चुनाव 2019 में वाराणसी सीट से उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली एक याचिका के संबंध में दिया गया है। याचिका वाराणसी लोकसभा सीट से पहले निर्दलीय और फिर सपा-बसपा-आरएलडी महागठबंधन के प्रत्याशी बने पूर्व बीएसएफ जवान तेज बहादुर ने लगाई थी। इस चुनाव में अंतिम दौर में नामांकन खारिज होने के चलते तेज बहादुर चुनाव नहीं लड़ पाए थे। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
यह है तेजबहादुर का आरोपः प्रधानमंत्री के खिलाफ यह आदेश जस्टिस एमके गुप्त ने दिया है। तेजबहादुर का आरोप है कि वाराणसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए दाखिल किए गए उसके नामांकन पत्र में गलत जानकारी देने की बात कहकर उसे निरस्त कर दिया गया। उसे आपत्तियों पर जवाब दाखिल करने के लिए समय नहीं दिया गया। कानून के मुताबिक उसे जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय मिलना चाहिए, जो नहीं दिया गया। तेजबहादुर का कहना है कि निर्वाचन अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव में उसके खिलाफ निर्णय लिया था। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जिम्मेदार ठहराया।
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…इसलिए निरस्त हुआ था नामांकनः निर्वाचन आयोग ने तेजबहादुर पर बीएसएफ से बर्खास्त होने की बात छिपाने का आरोप लगाकर नामांकन खारिज कर दिया था। कोर्ट ने रजिस्टर्ड डाक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नोटिस भेजने का आदेश दिया है। साथ ही उसका प्रकाशन कम से कम दो समाचार पत्रों में कराने को कहा है। बता दें कि वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार चुनाव जीते हैं। उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव भी यहीं से जीता था।
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