Centre’s Bill To Take Control Over Chandigarh: केंद्र सरकार चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में शामिल करने की तैयारी कर रही है। लोकसभा और राज्यसभा के बुलेटिन के अनुसार, केंद्र सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इस संबंध में 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी। इसको लेकर अरविंद केजरीवाल ने प्रतिक्रिया दी है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “BJP की केंद्र सरकार द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को खत्म करने की कोशिश किसी साधारण कदम का हिस्सा नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। फेडरल स्ट्रक्चर की धज्जियां उड़ाकर पंजाबियों के हक छीनने की यह मानसिकता बेहद खतरनाक है।”
पंजाब आज भी नहीं झुकेगा- अरविंद केजरीवाल
आप के राष्ट्रीय संयोजक ने आगे कहा, “जिस पंजाब ने देश की सुरक्षा, अनाज, पानी और इंसानियत के लिए हमेशा बलिदान दिया, आज उसी पंजाब को उसके अपने हिस्से से वंचित किया जा रहा है। ये केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि ये पंजाब की आत्मा को चोट पहुंचाने जैसा है। इतिहास गवाह है कि पंजाबियों ने कभी किसी तानाशाही के सामने सिर नहीं झुकाया। पंजाब आज भी नहीं झुकेगा। चंडीगढ़ पंजाब का है और पंजाब का रहेगा।”
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केंद्र सरकार पेश करेगी 131वां संशोधन विधेयक
बता दें कि केंद्र सरकार 1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2025 पेश करेगी। इस कदम का पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और विपक्षी कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है। दोनों पार्टियों का कहना है कि बीजेपी के नेतृत्व वाला केंद्र सरकार सीमावर्ती राज्य चंडीगढ़ पर उसके जायज दावे को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, भाजपा ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उत्तर क्षेत्र परिषद की बैठक में चंडीगढ़ को पंजाब की विशेष राजधानी बनाने का मुद्दा उठाया। आप नेता ने कहा कि सरकार को इस बात की जरा भी भनक नहीं थी कि केंद्र इस कदम की योजना बना रहा है। मान ने कहा, “शनिवार को अपलोड किया गया बुलेटिन हमारे लिए अचानक आई किसी आपदा से कम नहीं है। हमें नहीं पता था कि ऐसा होगा। मान साहब ने बैठक में यह मुद्दा उठाया था, क्योंकि पंजाब यूनिवर्सिटी मामले के दौरान यह एक प्रबल भावना बन गई थी।”
