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ईरान में हो रहे प्रदर्शन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार सख्त रुख अपनाए हुए थे। अमेरिका लगातार ईरान पर हमले की धमकी दे रहा था। कुछ समय पहले तक ऐसा लग रहा था कि दुनिया में एक और जंग शुरू होने वाली है। लेकिन फिलहाल ये जंग रुक गई है। (Photo: @alilarijani_ir/X)
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चार देशों ने रुकवाई जंग
दरअसल, चार अरब देशों सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों से बातचीत की इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि फिलहाल अमेरिका, ईरान पर हमला नहीं करेगा। उन्होंने कहा है कि ईरान में हिंसा की घटनाएं कुछ कम हुई हैं। अगर ईरान पर अमेरिका हमला करता तो खाड़ी देशों में भी असर पड़ता। (Photo: @alilarijani_ir/X) -
अमेरिका को उलझाने में अली लारीजानी की अहम भूमिका
इन चार देशों के प्रयासों के अलावा एक और चेहरा है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि इस युद्ध को रुकवाने में अहम भूमिका निभाई है। दरअसल, यह कोई और नहीं बल्कि अली लारीजानी है जिनका तेहरान में खूब चर्चा हो रहा है। अमेरिका ने अली लारीजानी पर प्रतिबंध भी लगा दिया है। आइए जानते हैं कौन हैं अली लारीजानी और कैसे उनके रणनीति में अमेरिका उलझ गया। (Photo: @alilarijani_ir/X) -
कौन हैं अली लारीजानी?
अली लारीजानी ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख हैं। कई इंटरनेशनल रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि इस पद पर बैठने के बाद लारीजानी ने ईरान की ऐसी मजबूत किलेबंदी की कि अमेरिका चाहकर भी तेहरान पर हमला नहीं कर पाया। ऐसा दावा किया जा रहा है कि उनकी रणनीति ऐसी थी जिसमें अमेरिका उलझ गया। (Photo: @alilarijani_ir/X) ईरान और भारत एक दूसरे से क्या-क्या आयात और निर्यात करते हैं? -
इन पदों पर रह चुके हैं अली लारीजानी
खामनेई सरकार ने अली लारीजानी को अगस्त 2025 को ईरान सर्वोच्च सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया था। उन्हें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का धुर-विरोधी माना जाता है। लारीजानी पहली बार साल 2004 में सुप्रीम लीडर खामेनेई की टीम में शामिल हुए थे। उस दौरान खामेनेई ने उन्हें अपना सलाहकार नियुक्त किया था। (Photo: @alilarijani_ir/X) -
लड़ चुके हैं राष्ट्रपति का चुनाव
अली लारीजानी ने अपने करियर की शुरुआत इस्लामिक गार्ड्स में कमांडर की नौकरी से की थी। 1994 में उन्हें इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग का प्रमुख बनाया गया। वह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के पूर्व सदस्य भी रह चुके हैं। साल 2005 में वह राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ चुके हैं। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। साल 2024 के चुनाव में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था। (Photo: @alilarijani_ir/X) -
तीन बार गए सऊदी अरब
अली लारीजानी ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के काफी करीबी माने जाते हैं। सुरक्षा परिषद की कमान संभालते ही वह अपने काम में जुट गए। सबसे पहले उन्होंने ईरान के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले सऊदी अरब से संपर्क किया। पिछले 6 महीने में वो करीब 3 बार सऊदी के टॉप लीडरशिप से मुलाकात कर चुके हैं। पिछले ही साल सितंबर में लारीजानी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से भी मुलाकात की थी। (Photo: @alilarijani_ir/X) -
काम आया पड़ोसी देशों का दौरा
सऊदी अरब के अलावा उन्होंने इराक, लेबनान और पाकिस्तान का भी दौरा किया। उनका यह दौरान ईरान के लिए फायदेमंद साबित हुआ। इस पद पर बैठते ही उन्होंने लगभग सभी पड़ोसी देशों का दौरा किया। (Photo: @alilarijani_ir/X) -
ईरान में तीन बड़े बदलाव
ईरान में जब प्रदर्शन बढ़ा तो उन्होंने तीन बड़े बदलाव किए। अहमद वाहिदी को उप कमांडर नियुक्त किया। ये वही वाहिदी हैं जिनपर अमेरिका कई साल पहले बैन लगा चुका है। इसके बाद उन्होंने ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया को सोना का प्रवक्ता नियुक्त किया। (Photo: @alilarijani_ir/X) -
खुलकर करते हैं अमेरिका और इरजायल का विरोध
ईरान में प्रदर्शन के दौरान वह सरकार की तरफ से टीवी पर इंटरव्यू भी देते नजर आए। इस विद्रोह की कड़ी उन्होंने अमेरिका और इजराइल से जोड़ा। उनको एक्स अकाउंट पर जाएंगे तो कई सारे ऐसे पोस्ट मिल जाएंगे जिसमें उन्होंने खुल तौर पर कहा है कि इस विद्रोह के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ है। (Photo: @alilarijani_ir/X) -
काफी पढ़े लिखे हैं
अली लारीजानी एक प्रतिष्टित शिया धार्मिक परिवार से हैं। उनके पिता आयतुल्लाह मिर्जा हाशिम आमोली ईरान के जाने-माने और प्रभावशाली धर्मगुरु थे। उन्होंने कंप्यूटर साइंस और गणित में बीएससी की है। उन्होंने पीएचडी भी किया है। (Photo: @alilarijani_ir/X) सोना, तांबा और यूरेनियम के अलावा और क्या-क्या उगलती है ईरान की धरती, इन खनिजों का है भंडार