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नींद को अक्सर हम आराम समझकर हल्के में ले लेते हैं, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा हैरान करने वाली है। नींद दरअसल शरीर और दिमाग की मेंटेनेंस मोड होती है। जब आप सोते हैं, तब आपका दिमाग ‘ऑफ’ नहीं होता, बल्कि बेहद सक्रिय रहता है। आइए जानते हैं नींद से जुड़े कुछ ऐसे वैज्ञानिक तथ्य, जो सुनने में अविश्वसनीय लगते हैं, लेकिन पूरी तरह सच हैं। (Photo Source: Unsplash)
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नींद के दौरान हर रात आपका शरीर लगभग लकवाग्रस्त हो जाता है
REM (रैपिड आई मूवमेंट) स्लीप के दौरान दिमाग जानबूझकर मांसपेशियों की गतिविधि को रोक देता है। इसका मकसद यह होता है कि आप अपने सपनों को असल जिंदगी में न दोहराएं। अगर ऐसा न हो, तो इंसान सपने देखते हुए खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचा सकता है। (Photo Source: Unsplash) -
सपने पूरी रात नहीं, छोटे-छोटे दौर में आते हैं
आम धारणा के विपरीत, सपने लगातार नहीं चलते। ज्यादातर सपने REM स्लीप के दौरान आते हैं, जो हर लगभग 90 मिनट में एक बार होता है। यानी रात भर में दिमाग कई चक्रों में सपनों को देखता और छोड़ता है। (Photo Source: Unsplash) -
नींद की कमी नशे जैसी हालत पैदा कर देती है
लगातार जागना दिमाग पर वैसा ही असर डालता है, जैसा शराब पीने से होता है। रिएक्शन टाइम धीमा हो जाता है, निर्णय लेने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है और गलतियां बढ़ने लगती हैं। कई स्टडीज़ में पाया गया है कि नींद से वंचित व्यक्ति की हालत नशे में धुत व्यक्ति जैसी हो सकती है। (Photo Source: Unsplash) -
सोते वक्त दिमाग खुद की सफाई करता है
नींद के दौरान दिमाग में एक खास वेस्ट-क्लीनिंग सिस्टम सक्रिय होता है, जो दिनभर जमा हुए टॉक्सिन्स और बेकार पदार्थों को बाहर निकालता है। यही कारण है कि अच्छी नींद दिमागी सेहत के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है। (Photo Source: Unsplash) -
माइक्रो-स्लीप बिना एहसास के हो सकती है
कभी-कभी दिमाग कुछ सेकंड के लिए बंद हो जाता है, जबकि आंखें खुली रहती हैं। इसे माइक्रो-स्लीप कहा जाता है। यह अक्सर नींद की कमी में होता है और ड्राइविंग या काम के दौरान बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। (Photo Source: Unsplash) -
कुछ लोग जन्म से ही कम नींद में काम चला लेते हैं
यह हर किसी के साथ नहीं होता, लेकिन कुछ दुर्लभ जीन ऐसे होते हैं, जिनकी वजह से कुछ लोग बहुत कम नींद लेकर भी सामान्य रूप से काम कर पाते हैं। हालांकि, ऐसे लोग बहुत कम होते हैं और इसे आम आदत समझना खतरनाक हो सकता है। (Photo Source: Pexels) -
पूरी तरह सोने से पहले भी सपने शुरू हो सकते हैं
जब दिमाग जागने और सोने के बीच की अवस्था में होता है, तब हाइप्नागॉजिक ड्रीम्स आते हैं। इसमें व्यक्ति को लगता है कि वह अभी जाग रहा है, लेकिन दिमाग सपनों की दुनिया में प्रवेश कर चुका होता है। (Photo Source: Unsplash) -
नींद में भी दिमाग पूरी तरह सक्रिय रहता है
खासतौर पर REM स्लीप के दौरान दिमाग की गतिविधि इतनी तेज हो सकती है कि वह जागने की स्थिति से भी ज्यादा हो जाती है। यादों को सहेजना, सीखने की प्रक्रिया और भावनाओं को संतुलित करना, सब कुछ इसी दौरान होता है। (Photo Source: Pexels) -
नींद आराम नहीं, शरीर की मरम्मत है
जब आप सोते हैं, तब आपका दिमाग मांसपेशियों को नियंत्रित करता है, यादों को दोहराता है, न्यूरॉन्स को सक्रिय करता है और चेतना के अलग-अलग स्तरों के बीच आवाजाही करता है। नींद की कमी से रिएक्शन टाइम गिरता है, निर्णय क्षमता कमजोर होती है और बिना चेतावनी माइक्रो-शटडाउन हो सकते हैं। ये कोई मिथक नहीं हैं। ये वो बायोलॉजिकल सच्चाइयां हैं, जिन पर आपका शरीर हर रात काम करता है। इसलिए अपनी नींद की सुरक्षा ऐसे करें, जैसे आप अपने भविष्य की करते हैं। (Photo Source: Unsplash)
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