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भाई-बहन का रिश्ता सिर्फ बचपन की शरारतों या पारिवारिक यादों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवनभर मानसिक और भावनात्मक सहारा देने वाला संबंध बन सकता है। हालिया रिसर्च बताती है कि जिन लोगों के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूत, सहयोगी और स्नेहपूर्ण रिश्ते होते हैं, उनमें वयस्क और वृद्धावस्था में डिप्रेशन, एंग्जायटी और अकेलेपन की समस्या कम देखी जाती है। (Photo Source: Pexels)
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रिसर्च क्या कहती है
‘जर्नल ऑफ़ फ़ैमिली साइकोलॉजी’ में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, शोधकर्ताओं ने 60 वर्ष से अधिक उम्र के 608 बुजुर्गों पर किए गए अध्ययन में पाया कि जिन लोगों के अपने भाई-बहनों के साथ रिश्ते गर्मजोशी भरे थे, वे मानसिक रूप से अधिक संतुलित और खुशहाल थे। (Photo Source: Pexels) -
वहीं जिन रिश्तों में टकराव, ईर्ष्या या माता-पिता के पक्षपात की भावना थी, उनमें डिप्रेशन, चिंता, गुस्सा और अकेलेपन के लक्षण अधिक पाए गए। अध्ययन के अनुसार, सिबलिंग रिलेशनशिप की क्वालिटी मानसिक स्वास्थ्य के लिए निर्णायक भूमिका निभाती है, न कि सिर्फ रिश्ते का होना। (Photo Source: Pexels)
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अकेलेपन से बचाव में अहम भूमिका
रिसर्च में यह भी सामने आया कि भाई-बहन का स्नेह अकेलेपन को कम करने में एक भावनात्मक बफर की तरह काम करता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, जीवनसाथी का साथ छूट सकता है या बच्चे अपने जीवन में व्यस्त हो जाते हैं। ऐसे में भाई-बहन भावनात्मक सुरक्षा और समझ का स्थायी स्रोत बन सकते हैं। (Photo Source: Pexels) -
शोधकर्ताओं ने पाया कि लोनलीनेस (Loneliness) आंशिक रूप से यह समझाती है कि सिबलिंग बॉन्ड मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है। यानी, अच्छे रिश्ते अकेलापन घटाते हैं और यही बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की वजह बनता है। (Photo Source: Pexels)
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बहन-बहन के रिश्ते ज्यादा मजबूत
अध्ययन के मुताबिक, बहन-बहन (Sister–Sister) के रिश्ते अन्य सिबलिंग कॉम्बिनेशन की तुलना में ज्यादा गर्मजोशी भरे पाए गए। इनमें भावनात्मक बातचीत और आपसी सहयोग अधिक देखा गया। हालांकि शोध यह भी संकेत देता है कि भावनात्मक जुड़ाव के साथ भावनात्मक जिम्मेदारी का दबाव भी ज्यादा हो सकता है। (Photo Source: Pexels) -
संघर्ष और पक्षपात बनते हैं खतरा
शोध में यह स्पष्ट हुआ कि जिन परिवारों में भाई-बहनों के बीच लगातार संघर्ष रहा या माता-पिता के पक्षपात की भावना बनी रही, वहां वयस्कता और वृद्धावस्था में मानसिक परेशानियां ज्यादा देखने को मिलीं। ऐसे रिश्ते तनाव को कम करने के बजाय बढ़ा सकते हैं। (Photo Source: Pexels) -
उम्र के साथ बदलता रिश्ता
बचपन और किशोरावस्था में जहां सिबलिंग रिश्तों में टकराव और प्रतिस्पर्धा आम होती है, वहीं युवावस्था और मध्य आयु में यह रिश्ता अपेक्षाकृत स्थिर हो जाता है। वृद्धावस्था में, जब सामाजिक दायरा सिमटने लगता है, तब भाई-बहन का रिश्ता फिर से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। (Photo Source: Pexels) -
एक्सपर्ट्स की राय
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, भाई-बहन का रिश्ता जीवन का सबसे लंबा चलने वाला सामाजिक संबंध होता है। यदि इसे समझदारी, संवाद और भावनात्मक खुलेपन के साथ निभाया जाए, तो यह जीवनभर मानसिक मजबूती और भावनात्मक संतुलन प्रदान कर सकता है। (Photo Source: Pexels)
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