पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले सिंगूर मुद्दा एक बार फिर बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गया है। बंगाल बीजेपी अब तृणमूल सुप्रीमो को घेरने की कोशिश कर रही है, उसी सिंगूर का इस्तेमाल करते हुए, जो कभी सिंगूर आंदोलन के दौरान ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्थान का मंच बना था। बीजेपी का दावा है कि सत्ता में आने पर वह टाटा को सिंगूर वापस लाएगी। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी रविवार को सिंगूर में एक जनसभा को संबोधित करने वाले हैं।
कोलकाता से लगभग 40 किलोमीटर दूर मौजूद सिंगूर, 2006-08 के दौरान राज्य की राजनीति में सबसे बड़े संघर्षों में से एक का केंद्र था। बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने टाटा नैनो कारखाने के लिए लगभग 1000 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण कर लिया, जिससे उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। तत्कालीन विपक्षी नेता ममता बनर्जी इस आंदोलन का चेहरा बन गईं। भूमि आंदोलन जल्द ही राज्यव्यापी राजनीतिक आंदोलन में तब्दील हो गया। सिंगूर आंदोलन पुलिस के साथ झड़पों, गिरफ्तारियों और कोलकाता में ममता की 21 दिनों की भूख हड़ताल के कारण सुर्खियों में रहा।
टाटा ने साणंद में ट्रांसफर कर दी थी अपनी फैक्ट्री
टाटा मोटर्स ने आखिरकार 2008 में अपनी फैक्ट्री सिंगूर से गुजरात के साणंद में ट्रांसफर कर दी। उस समय, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद रतन टाटा को ‘स्वागत है’ लिखकर एक एसएमएस भेजने की बात याद की थी। 2010 में सानंद नैनो फैक्ट्री के उद्घाटन के अवसर पर मोदी ने कहा था, “आप देख सकते हैं कि एक रुपये का एसएमएस क्या कर सकता है।”
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सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों की बदौलत तृणमूल कांग्रेस 2011 में सत्ता में आई और 34 सालों के वामपंथी शासन का अंत किया। बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण को अवैध घोषित कर अनिच्छुक किसानों को जमीन वापस करने का आदेश दिया। तृणमूल आज भी उस फैसले को किसानों के अधिकारों के प्रमाण और अपने आंदोलन की नैतिक जीत के रूप में पेश करती है।
सिंगूर को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश में जुटी बीजेपी
हालांकि, लगभग दो दशकों के बाद भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर सिंगूर को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का दावा है कि सिंगूर आंदोलन से आए राजनीतिक बदलावों के बावजूद, राज्य ने औद्योगीकरण का एक बड़ा अवसर खो दिया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने सिंगूर को ‘बंगाल के खोए हुए औद्योगीकरण का प्रतीक’ बताया और कहा कि टाटा को निष्कासित किए जाने के बाद से ही उद्योग राज्य छोड़कर चला गया है। उनका दावा है कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है, तो टाटा को सिंगूर वापस लाया जाएगा।
पुराने घावों को कुरेदने की कोशिश कर रही बीजेपी- कुणाल घोष
बीजेपी सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस बांग्ला को बताया, 18 जनवरी को मोदी की रैली में वे किसान शामिल होंगे जिन्होंने कभी भूमि आंदोलन में भाग लिया था और अब उद्योग और रोजगार की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी की कोशिशों को राजनीतिक उदासीनता करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि बीजेपी इतिहास और किसानों के संघर्ष को नजर अंदाज करके पुराने घावों को कुरेदने की कोशिश कर रही है। राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि भूमि आंदोलन के दौरान बीजेपी नेता कहां थे।
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