भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी वाकपटुता को लेकर भी जाने जाते है। साल 1998 के गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद जब पत्रकार ने नरेंद्र मोदी से बात की थी तो उन्होंने कहा था कि अटल जी ने जो कुछ समय पहले कहा था कि गुजरात भाजपा को ग्रहण लग गया है। अब हम उस समस्या से बाहर आ जाएंगे। साथ ही उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा था कि आरएसएस में साधु नहीं होते हैं।
जब पत्रकार ने नरेंद्र मोदी से पूछा कि कुछ ही दिन पहले शंकरसिंह वाघेला पर पथराव हुए थे। और वीएचपी और आरएसएस के साधुओं ने उनके खिलाफ प्रदर्शन भी किया है। जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि आपकी जानकारी सही नहीं है। मै गुजरात से ही आया हूं कोई पथराव नहीं हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि आरएसएस के कोई साधु होते नहीं है। विश्व हिंदु परिषद के भी साधु नहीं होते हैं। लेकिन ये बात सही है कि कुछ संत नाराज थे।
साल 2000 से पहले मोदी गुजरात में बीजेपी के तीसरे नंबर के नेता हुआ करते थे। शंकरसिंह वाघेला के पार्टी छोड़ने के बाद और केशुभाई पटेल की सरकार से केंद्रीय नेतृत्व की नाराजगी के कारण उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया था। 1998 के चुनाव के बाद उन्होंने पत्रकार के सवालों का जवाब देते हुए बिना नाम लिए वाघेला पर हमला बोला था और कहा था कि कुछ लोग व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण दिक्कत कर रहे थे। लेकिन अब वो समस्या नहीं है।
जब पत्रकार ने उनसे पूछा कि इस चुनाव में कम मतदान प्रतिशत का क्या कारण रहा है? जवाब देते हुए मोदी ने कहा था कि इस चुनाव में कांग्रेस में कोई दम ही नहीं था। और जब विरोधियों में कोई ताकत नहीं रह जाती है तो लड़ाई में मजा नहीं आता है। लोगों में उत्तेजना नहीं आती है। इस कारण वोट कम पड़े हैं।
उस समय नरेंद्र मोदी ने कहा था कि केशुभाई पटेल पूरे चुनाव के स्टार प्रचारक थे। मेरी जानकारी के अनुसार केशुभाई ने 230 स्थानों पर इस चुनाव में दौरा किया है। इस चुनाव के विजय में केशुभाई का बहुत बड़ा योगदान है।
