यूपी चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। जिधर देखो उधर, चुनावी हलचल ही दिखाई दे रही है। हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के लिए योगी आदित्यनाथ बाबा विश्वनाथ के दर पर आज पहुंचे तो पीएम मोदी 15 जुलाई को काशी आएंगे। मौके की नजाकत को देख कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी 16 को लखनऊ आ रही हैं।

योगी बीते सप्ताह भी काशी आए थे। बीते सोमवार की रात योगी ने परियोजनाओं का निरीक्षण करने के बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ की पूजा अर्चना कर प्रदेश के लोगों के लिए मंगल कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के भव्य परिसर का निरीक्षण भी किया। सूत्रों का कहना है कि पहले बाबा के दर पर योगी और अब 15 को मोदी के पहुंचने से साफ है कि बीजेपी पुराने हथियार को धार दे रही है।

उधर, मौके की नजाकत को देख प्रियंका ने भी 16 से यूपी प्रवास का मन बना लिया है। वो 3-4 दिनों तक यहां रहेंगी। इस दौरान वो पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर मंथन करेंगी। उनकी किसान नेताओं के साथ बेरोजगार युवकों से भी मिलने की योजना है। इससे पहले वो दिल्ली में कांग्रेस के नेताओं के साथ तमाम मसलों पर मंथन कर रही थीं। इस दौरान बीजेपी के खिलाफ धरातल पर उतकर मुद्दा आधारित विरोध जताने की रणनीति पर विचार किया गया।

YOGI, BABA VISHWANATH
बाबा विश्वनाथ के मंदिर में पूजा करते सीएम योगी। (फोटोः ANI)

आप और सपा के बीच मुफ्त घोषणाओं की जंग

उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी बड़े और लोकलुभावन वादों के साथ उतरने की तैयारी में है। लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टर में इसकी झलक देखने को मिली है। इसमें फ्री बिजली और लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया गया है।

ध्यान रहे कि फ्री बिदली का कॉन्सेप्ट दिल्ली में आम आदमी पार्टी की अरविंद केजरीवाल सरकार का है। वहीं 10 लाख सरकारी नौकरियों का फॉर्मूला बीते साल बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के घोषणा पत्र में किए गए वादे से प्रभावित लगता है। आप ने उत्तराखंड, पंजाब के साथ यूपी में भी दिल्ली की तर्ज पर मुफ्त सौगातें देने का ऐलान किया है।

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बाबा विश्वनाथ का अभिषेक करते सीएम योगी (फोटोःANI)

मायावती भी मैदान में उतरीं

बसपा की अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मंगलवार को जनसंख्‍या नियंत्रण के लिए सरकार के प्रस्तावित कानून पर संदेह प्रकट करते हुए आरोप लगाया कि इसमें लोगों को सरकार की गंभीरता कम, चुनावी स्वार्थ ज्यादा लग रहा है। मायावती ने कि अगर जनसंख्या नियंत्रण को लेकर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार थोड़ी भी गंभीर होती तो यह काम सरकार को तब ही शुरू कर देना चाहिये था जब इनकी सरकार बनी थी।