लालू यादव के बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने UGC के नए कानून को केंद्र सरकार का ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में नए नियम के समर्थन की बात कही।
तेज प्रताप यादव ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) द्वारा “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” कानून गरीब, दलित, पिछड़ा, अतिपिछड़ा समाज के छात्रों के हित में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने कहा कि यह नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के साथ-साथ नियमों के मुताबिक हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनाने का लक्ष्य निर्धारित एक बेहद ही सराहनीय कदम है।
इसी पोस्ट में तेज प्रताप यादव ने आगे कहा, “इस कानून के मुताबिक ये कमेटी एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी। यह कानून विश्वविद्यालय और कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों को एक समानता प्रदान कर, संविधान में विदित समानता और अधिकार को अधिक मजबूती देगा।”
‘दलित, आदिवासी और OBC सनातन का हिस्सा’
नए नियम का विरोध कर रहे लोगों पर तंज कसते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा कि जो भी लोग इस कानून को सनातन से जोड़ कर देख रहे हैं, शायद उन अल्पज्ञानियों को यह नहीं पता है कि दलित, आदिवासी और पिछड़ा समाज भी सनातन के अंतर्गत ही आता है और ये भी हमारे ही भाई-बहन हैं।
सामान्य वर्ग के छात्र यूजीसी कार्यालय के बाहर करेंगे प्रदर्शन
मंगलवार को सामान्य वर्ग के छात्रों ने दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के बाहर मंगलवार को प्रदर्शन का आह्वान करते हुए कहा कि आयोग द्वारा जारी नए विनियम परिसरों में अराजकता पैदा कर सकते हैं। प्रदर्शन का आह्वान करने वालों ने छात्र समुदाय से एकजुटता की अपील की, उनसे “यूजीसी के भेदभाव को ना” कहने का आग्रह किया और बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर अपना विरोध दर्ज कराने का अनुरोध किया।
सामान्य वर्ग से जुड़े छात्र क्यों कर रहे विरोध?
दिल्ली विश्वविद्यालय में पीएचडी के छात्र आलोकित त्रिपाठी ने पीटीआई से कहा कि नए नियमों से महाविद्यालयों में पूरी तरह अराजकता पैदा हो जाएगी क्योंकि अब प्रमाण का बोझ पूरी तरह आरोपी पर डाल दिया जाएगा और गलत आरोप झेलने वाले छात्रों के लिए कोई सुरक्षा प्रावधान नहीं है।
आलोकित त्रिपाठी ने कहा, “नए विनियम दमनकारी प्रकृति के हैं। पीड़ित की परिभाषा पहले से तय है। परिसर में पीड़ित कोई भी हो सकता है।” उन्होंने कहा, “प्रस्तावित समानता (इक्विटी) दस्तों का मतलब परिसर के भीतर लगातार निगरानी में रहने जैसा होगा।” आलोकित त्रिपाठी ने यह भी कहा कि दिल्ली के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों के इस प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना है।
UGC ने क्या नियम बनाया है?
महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए नए विनियमों के तहत यूजीसी ने संस्थानों से शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी दल गठित करने को कहा है ताकि खासकर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके।
UGC Kanoon Ka Matlab Kya Hai: आसान भाषा में समझिए यूजीसी का नया कानून क्या है?
