राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी का दावा है कि दिल्ली चुनाव में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस ने जानबूझकर आप के लिए मैदान छोड़ दिया है। केटीएस तुलसी का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब विभिन्न एग्जिट पोल में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सत्ता में वापसी की बात कही गई है। एग्जिट पोल में कांग्रेस को सिर्फ 1-5 सीटें ही मिलने की बात कही गई है।
केटीएस तुलसी ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा कि “ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने भाजपा को हराने के लिए कुर्बानी दी है और वोटों का बंटवारा नहीं होने दिया है। यदि कांग्रेस भी चुनाव में पूरी ताकत लगाती तो इसका फायदा भाजपा को मिलता।”
राजनैतिक पंडितों का कहना है कि गरीब और मुस्लिम समुदाय दिल्ली में कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता है, लेकिन फिलहाल ये वोट बैंक आप के खाते में चला गया है। यदि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान जोर लगाया होता तो शायद ये वोट बैंक आप और कांग्रेस के बीच बंट सकता था, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलता।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी एग्जिट पोल में आप की जीत को विकास की जीत करार दिया है। चौधरी ने कहा कि यदि केजरीवाल जीतते हैं तो यह विकास के एजेंडे की जीत होगी। हालांकि उन्होंने कांग्रेस के चुनाव प्रचार में जोर नहीं लगाने की बात को नकार दिया और कहा कि पार्टी अपनी पूरी ताकत से चुनाव लड़ी।
दिल्ली चुनाव में यदि एग्जिट पोल के नतीजों से मिलते जुलते नतीजे आते हैं तो यह भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। दरअसल भाजपा ने दिल्ली चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगायी थी और प्रचार के लिए अपने की नेताओं को लगाया था।
अधीर रंजन चौधरी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने शाहीन बाग का ही मुद्दा उठाया, जबकि अरविंद केजरीवाल विकास की बात करते रहे। कांग्रेस ने शीला दीक्षित के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को लेकर दिल्ली की जनता को लुभाने का प्रयास किया।
बता दें कि दिल्ली चुनाव के एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी के तीन चौथाई सीटें जीतने का दावा किया जा रहा है। मतगणना 11 फरवरी को होगी। बीते विधानसभा चुनाव में भी आप ने 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

