नेशनल कमिशन फॉर मॉइनॉरिटीज (NCM) के चेयरमैन गयूरुल हसन रिजवी ने अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रिव्यू पिटिशन दाखिल करने को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दायर करने से बचना चाहिए। उनके इस कदम से संकेत जाएगा कि मुस्लिम राम मंदिर के निर्माण में रुकावट डाल रहे हैं। राम के प्रति हिंदुओं की काफी आस्था है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाना देश को तोड़ने जैसा हो सकता है।
गयूरुल हसन रिजवी ने कहा, ‘‘यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले हिंदुओं, मुस्लिम और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देश से वादा किया था कि फैसला जो भी हो, उन्हें मंजूर होगा। मुस्लिमों ने यह कभी नहीं कहा कि वे फैसले का पालन तभी करेंगे, जब वह उनके पक्ष में आएगा। ऐसे में रिव्यू पिटिशन दायर करने से काफी खतरनाक मैसेज जाएगा। इससे लगेगा कि मुस्लिम जानबूझकर राम मंदिर के निर्माण में रुकावट डाल रहे हैं। मुस्लिम अगर सशक्तीकरण चाहते हैं तो उन्हें आगे बढ़ना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद बनानी चाहिए, जो साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बनेगी।
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गौरतलब है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की वर्किंग कमेटी ने अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर करने का फैसला किया था। हालांकि, प्रमुख मुस्लिम सामाजिक-धार्मिक संगठन, जमीयत उलमा-ए-हिंद, इस मुद्दे पर बंटा हुआ है। एक गुट रिव्यू पिटिशन दायर करना चाहता है, जबकि दूसरे पक्ष का मानना है कि यह बेकार कोशिश होगी। इससे फैसले में कोई बदलाव नहीं होगा।

