एआर रहमान आज बॉलीवुड के सबसे मशहूर और सम्मानित संगीतकारों में से एक हैं, लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी शुरुआत आसान नहीं रही। उन्होंने 1991 में मणिरत्नम की फिल्म ‘रोजा’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद ‘बॉम्बे’ और ‘दिल से…’ जैसी हिट फिल्मों में काम किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लंबे समय तक यह महसूस होता रहा कि वे हिंदी सिनेमा में पूरी तरह स्वीकार नहीं किए गए हैं।

रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘रंगीला’ ने उन्हें अलग पहचान दिलाई, लेकिन असली अपनापन उन्हें 1999 में आई सुभाष घई की फिल्म ‘ताल’ के बाद महसूस हुआ। रहमान के मुताबिक, ‘ताल’ का संगीत उत्तर भारत में आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है क्योंकि इसमें हिंदी, पंजाबी और पहाड़ी संगीत का मेल है।

हिंदी सीखने की सलाह

रहमान ने बताया कि शुरुआत में वे हिंदी ठीक से नहीं बोल पाते थे, जिसकी वजह से इंडस्ट्री से दूरी महसूस होती थी। सुभाष घई ने उन्हें सलाह दी कि अगर उन्हें बॉलीवुड में लंबे समय तक टिकना है, तो हिंदी सीखनी होगी। इसके बाद रहमान ने हिंदी के साथ-साथ उर्दू, अरबी और पंजाबी भाषा पर भी काम किया। यहीं से सुखविंदर सिंह के साथ उनकी जोड़ी बनी, जिसने ‘छैया छैया’, ‘रमता जोगी’ और ऑस्कर विजेता गाना ‘जय हो’ जैसे सुपरहिट गाने दिए।

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अब क्यों नहीं मिल रहा काम?

जब उनसे पूछा गया कि बॉलीवुड में तमिल समुदाय या महाराष्ट्र के बाहर के लोगों के साथ भेदभाव होने की बात कही जाती है। तो एआर रहमान ने जवाब दिया: “हो सकता है मुझे कभी इसकी जानकारी न हुई हो, हो सकता है इसे छुपाया गया हो, लेकिन मैंने ऐसा कुछ महसूस नहीं किया। शायद पिछले आठ सालों में सत्ता में बदलाव आया है और अब सत्ता उन लोगों के हाथ में है जो रचनात्मक नहीं हैं। यह सांप्रदायिक मुद्दा भी हो सकता है… लेकिन यह मेरे सामने नहीं है। मुझे कानाफूसी की तरह पता चलता है कि उन्होंने आपको बुक किया था, लेकिन संगीत कंपनी ने अपने 5 संगीतकारों को काम पर रख लिया। मैं कहता हूं अच्छा है, अब मेरे पास परिवार के साथ आराम करने के लिए और समय है। मैं काम की तलाश में नहीं हूं। मैं काम की तलाश में जाना नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि काम मेरे पास आए।”

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रहमान का कहना है कि वह काम की तलाश में नहीं हैं। वे चाहते हैं कि काम उनकी ईमानदारी और काबिलियत के दम पर खुद उनके पास आए। उन्होंने कहा, “जो मैं डिजर्व करता हूं, वही मुझे मिलेगा।”

एआर रहमान का 1997 का “वंदे मातरम” आज भी एक आइकॉनिक ट्रैक बना हुआ है। फिल्म निर्माता भारत बाला, जिन्होंने इस गाने के म्यूजिक वीडियो का निर्देशन किया था, उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि रहमान ने ट्रैक को 2 बजे रात में रिकॉर्ड किया था। उन्होंने गाने की रिकॉर्डिंग के वक्त को याद करते हुए कुछ भावुक पलों का जिक्र किया और बताया कि वो अपने आंसू नहीं रोक पाए थे। पूरी खबर पढ़ें…