विवाद के बीच बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम से बाहर कर दिया गया है। आईपीएल फ्रेंचाइजी ने कहा कि यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के निर्देशानुसार लिया गया है। वहीं, जेडीयू और टीडीपी नेताओं समेत भाजपा के कुछ सहयोगी दलों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। भाजपा के एक सूत्र ने कहा कि ऐसे फैसले जिनसे संबंध खराब होते हैं उनसे बचा जा सकता था।

यह फैसला बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोपों के बाद एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या करने और उसे जलाकर मार डालने की घटना के बाद पिछले कुछ हफ्तों में भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़े द्विपक्षीय तनाव के बीच आया है।

क्रिकेट और राजनीति को आपस में नहीं मिलाना चाहिए- JDU

जेडीयू के सलाहकार केसी त्यागी ने मंगलवार को कहा कि क्रिकेट और राजनीति को आपस में नहीं मिलाना चाहिए। त्यागी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा , “पहली बात तो यह है कि क्रिकेट और राजनीति को आपस में नहीं मिलाना चाहिए। हम समझते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट संबंध संभव नहीं हैं लेकिन फिर भी क्रिकेट को राजनीति से दूर रखा जा सकता था।”

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धार्मिक उपदेशक शाहरुख खान के खिलाफ फतवा जारी करने वाले कौन होते- केसी त्यागी

त्यागी ने कहा, “ये धार्मिक उपदेशक शाहरुख खान के खिलाफ फतवा जारी करने वाले कौन होते हैं? इसमें धार्मिक पूर्वाग्रह साफ झलकता है। अभिनेत्री जूही चावला और उनके व्यवसायी पति जय मेहता जो मिलकर केकेआर में 45% हिस्सेदारी रखते हैं, उनकी आलोचना करने का साहस उन्होंने क्यों नहीं दिखाया?” त्यागी ने कहा कि उनकी ये टिप्पणी एक जागरूक भारतीय नागरिक के तौर पर थी न कि जेडीयू नेता के रूप में। उन्होंने कहा कि वह क्रिकेट के मैदानों में बढ़ती कटुता के खिलाफ सिर्फ अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे।

केसी त्यागी ने बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या की निंदा करते हुए कहा, “हम पाकिस्तान के खिलाफ न खेलने के भारत के फैसले को समझते हैं क्योंकि पाकिस्तान का आतंकवादियों को भेजने का इतिहास रहा है लेकिन भारत और बांग्लादेश के बीच हाल ही में जो हो रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

भारत-बांग्लादेश संबंधों को बिगाड़ने के बजाय सुधारने के प्रयास किए जाने चाहिए

वहीं, टीडीपी नेता लावु श्री कृष्ण देवरायलु ने भी कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंधों को बिगाड़ने के बजाय सुधारने के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध थे, अब इनमें कुछ तनाव आ गया है इसलिए हमें संबंधों को सुधारने के लिए काम करने की जरूरत है। व्यापार और खेल जैसे कई क्षेत्र हैं जिन पर हम काम कर सकते हैं।”

हालांकि, जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट है। बीसीसीआई और केकेआर ने जो किया वह हिंदू अल्पसंख्यक के खिलाफ हुई घटनाओं पर प्रतिक्रिया थी। मोहम्मद यूनुस सरकार कट्टरपंथी ताकतों पर लगाम लगाने में विफल रही है, जिसके कारण वर्तमान स्थिति उत्पन्न हुई है।”

जेडीयू के एमएलसी और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि बांग्लादेश के साथ क्रिकेट संबंध जारी रखना है या नहीं, यह फैसला बीसीसीआई को करना होगा। कुमार ने कहा, “हम वहां हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की निंदा करते हैं लेकिन बीसीसीआई को यह सोचना होगा कि क्या दोनों देशों के बीच तनाव कम होने तक भारत और बांग्लादेश तटस्थ मैदानों पर क्रिकेट खेल सकते हैं।”

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