Tahawwur Hussain Rana: मुंबई आतंकवादी हमलों में संलिप्तता के आरोपी और पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यवसायी तहव्वुर राणा को अमेरिका से जल्द ही प्रत्यर्पित किया जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस को इस बारे में जानकारी मिली है। राणा को दिसंबर के आखिरी पखवाड़े में भारत लाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों की केंद्रीय एजेंसियों और कानूनी विभाग के अधिकारियों के साथ में हाल ही में दिल्ली में मीटिंग हुई थी।

एक अधिकारी ने बताया कि यह मीटिंग लगभग करीब तीन घंटे तक चली थी। इस पूरी बातचीत का फोकस इस तरफ था कि प्रत्यर्पण की सुविधा के लिए भारत सरकार की तरफ से क्या-क्या तैयारियां की गई हैं। साथ ही राणा के जेल में आने के बाद में क्या इंतजाम होगा। पिछले महीने ही कैलिफोर्निया में नौवें सर्किट के लिए अपील कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका को खारिज करने की पुष्टि की थी।

अब राणा के पास सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रत्यर्पण के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए केवल 45 दिन का समय है। सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद प्रत्यर्पण में ज्यादा से ज्यादा 45 दिनों की देरी हो सकती है। अमेरिकी सरकार की अदालतों की वेबसाइट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट हर साल समीक्षा करने के लिए कहे जाने वाले सात हजार से ज्यादा मामलों में से केवल 100-150 को ही मंजूरी देता है।

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तहव्वुर राणा डेविड हेडली का बचपन का दोस्त था। हेडली को अमेरिका के अधिकारियों ने अरेस्ट किया था और मुंबई हमलों में शामिल होने के लिए उसे 35 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। राणा ने पाकिस्तान के हसन अब्दल कैडेट स्कूल में पढ़ाई की थी। वहां पर हेडली ने भी पांच साल तक पढ़ाई की थी। पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर के तौर पर काम करने के बाद राणा कनाडा चला गया और आखिरकार उसे कनाडा की नागरिकता मिल गई। बाद में उसने शिकागो में फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज नाम से एक कंसल्टेंसी फर्म की स्थापना की।

मुंबई के आतंकी हमले में कई लोगों की जान गई

मुंबई में इस कारोबार की एक ब्रांच ने हेडली को पाकिस्तानी आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा के टारगेटों की पहचान करने और उन पर निगरानी रखने के लिए बेहतरीन कवर दे दिया। 26/11 के हमलों में 26 नवंबर, 2008 को 10 लश्कर आतंकवादियों ने मुंबई में धावा बोला और लगातार तीन दिनों तक शहर आतंक की चपेट में रहा। हिंसा में 6 अमेरिकियों समेत 166 लोगों की जान चली गई। हमलों को अंजाम देने वाले पाकिस्तानी नाव के जरिये भारत में पहुंचे। इस बात की जानकारी बाद में मिली थी।

राणा को अमेरिकी पुलिस ने अरेस्ट किया

अक्टूबर 2009 में शिकागो के ओ’हारे एयरपोर्ट पर हेडली की गिरफ्तारी के तुरंत बाद राणा को अमेरिकी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उसे 2011 में शिकागो में भारत पर हमले के लिए लश्कर-ए-तैयबा को मदद देने और और 2005 में पैगंबर के कार्टून छापने वाले डेनिश अखबार जाइलैंड्स-पोस्टेन पर हमला करने की कभी न अंजाम दी गई साजिश का समर्थन करने का दोषी ठहराया गया था। हालांकि, अमेरिका में जूरी ने राणा को मुंबई में हमलों के लिए मदद देने के ज्यादातर गंभीर आरोपों से मुक्त कर दिया है।