लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने ट्रंप टैरिफ के चलते भारतीय कपड़ा उद्योग की खस्ता हालत को लेकर कहा कि मोदी ने न तो टैरिफ को लेकर कोई राहत दी और न ही इस संबंध में कुछ कहा है। उन्होंने रोजगार के नुकसान और निर्यातकों के लिए बढ़ती अनिश्चितता के बीच सरकारी निष्क्रियता के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहराया।
राहुल गांधी ने भारतीय कपड़ा उद्योग को हो रहे नुकसान को लेकर सोशल प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “50% अमेरिकी टैरिफ और अनिश्चितता भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को बहुत नुकसान पहुंचा रही है। नौकरियों का जाना, फैक्ट्रियां बंद होना और ऑर्डर कम होना हमारी ‘खराब अर्थव्यवस्था’ की सच्चाई है।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि मिस्टर मोदी ने कोई राहत नहीं दी है और न ही टैरिफ के बारे में कुछ कहा है, जबकि 4.5 करोड़ से ज़्यादा नौकरियां और लाखों बिज़नेस खतरे में हैं। उन्होंने आगे कहा कि मोदी जी, आप ज़िम्मेदार हैं, कृपया इस मामले पर ध्यान दें!
राहुल गांधी ने हाल ही में गुरुग्राम के पास मानेसर में एक कपड़ा फैक्ट्री का दौरा किया और इसका वीडियो उन्होंने शुक्रवार को जारी किया। जिसमें उन्होंने देश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के बारे में विस्तार से समझने के लिए फैक्ट्री ऑपरेटर्स और वहां के कुछ वर्कर्स से बातचीत की।
उन्होंने अमेरिका द्वारा चीन-बांग्लादेश पर लगाए गए टैरिफ और भारत की तुलना में वहां होने वाले असर पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने भारत को बांग्लादेश से मिल रहे मुकाबले पर बात की। इस दौरान उन्होंने कपड़ा तैयार करने के लिए होने वाले कटिंग, स्टिचिंग, टिकटिंग और पैकिंग तक पूरी प्रक्रिया देखी। राहुल गांधी से बातचीत करते हुए फैक्ट्री संचालक ने बताया कि इंडियल टेक्सटाइल इंडस्ट्री रोजगार का एक बड़ा केंद्र है। यह देश में एग्रीकल्चर के बाद रोजगार देने वाला सबसे बड़ा सेक्टर है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था की तीखी आलोचना को दोहराते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था “मृत” है। इस स्थिति के लिए उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया था।
उन्होंने केंद्र सरकार पर नोटबंदी, दोषपूर्ण जीएसटी कार्यान्वयन और एमएसएमई तथा रोजगार सृजन के पतन जैसे निर्णयों के माध्यम से विकास को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। जिसके कारण उनकी टिप्पणियों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तीव्र थीं।
पिछले साल X पर एक पोस्ट में गांधी ने कहा था, “अर्थव्यवस्था मर चुकी है। मोदी ने इसे मार डाला।” उन्होंने इस गिरावट के प्रमुख कारणों को भी गिनाया: “अडानी-मोदी साझेदारी”, नोटबंदी, दोषपूर्ण जीएसटी, असफल “असेंबली इन इंडिया” पहल, लघु एवं मध्यम उद्यमों का खात्मा और कृषि क्षेत्र में संकट।”
उस वक्त मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को छोड़कर बाकी सभी को आर्थिक मंदी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री को छोड़कर यह बात सबको पता है। अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है। मुझे खुशी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सच्चाई बताई है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नीतियों ने नौकरियां खत्म कर दी हैं और छोटे व्यवसायों को नुकसान पहुंचाया है।
इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भारत और रूस पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा था कि भारत रूस के साथ जो भी करे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ बर्बाद कर सकते हैं, मुझे कोई परवाह नहीं। हमने भारत के साथ बहुत कम व्यापार किया है- उनके टैरिफ बहुत ऊंचे हैं, दुनिया में सबसे ऊंचे टैरिफ में से एक। इसी तरह, रूस और अमेरिका भी लगभग कोई व्यापार नहीं करते हैं।
भाजपा ने पलटवार किया
राहुल गांधी के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने नौकरियों में कटौती और कारखानों के बंद होने के आरोपों को खारिज कर दिया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि उद्योग का विस्तार हो रहा है, गिरावट नहीं आ रही है। उन्होंने कांग्रेस नेता पर गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया।
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गिरिराज सिंह ने कहा कि कपड़ा और परिधान उद्योग बंद नहीं हुए हैं, बंद तो सिर्फ उन लोगों के दिमाग में है जो भारत के बारे में नकारात्मकता फैला रहे हैं। अप्रैल से दिसंबर 2024 तक निर्यात 95,000 करोड़ रुपये था और अप्रैल से दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर 1,02,000 करोड़ रुपये हो गया। तो फिर वे किस बंद की बात कर रहे हैं? किस निर्यात में गिरावट आई है? भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान, कपड़ों या चमड़े के उत्पादों के लिए सिलाई मशीनें भारत में नहीं बनती थीं, और 40 लाख मशीनें आयात करनी पड़ी थीं। कपड़े से परिधान बनाने वाले क्षेत्र में एक मशीन 1.7 लोगों को रोजगार देती है। इसलिए आज 2 करोड़ मशीनों के साथ, अकेले इस क्षेत्र में कम से कम 3 करोड़ लोग कार्यरत हैं। पिछले 11 वर्षों में हमने कपड़ा क्षेत्र में 5 करोड़ लोगों के लिए रोजगार सृजित किया है। यह कोई बंद नहीं है। ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और पूरे देश के औद्योगिक केंद्रों का दौरा करें, और आप 60,000 करोड़ रुपये के निवेश देखेंगे। भारत के बारे में झूठे दावे फैलाना बंद करें।
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