झारखंड में हेमंत सोरेन को तगड़ा झटका लगा है। बाबू लाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा ने हेमंत सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस उनकी पार्टी के दो विधायक को अपने खेमे में करने की कोशिश कर रही थी। झारखंड विकास मोर्चा के दोनों विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की थी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे गए एक पत्र में बाबू लाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि झारखंड में गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस उनकी पार्टी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है।

पत्र में लिखा गया है, प्रिय श्री हेमन्त जी, हमारी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (प्र) ने दिनांक 24 दिसंबर,2019 को आपके नेतृत्व में यूपीए गठबंधन सरकार को बिना शर्त समर्थन देने के लिए पत्र लिखा था। परंतु UPA में शामिल कांग्रेस पार्टी हमारे पार्टी के विधायकों को तोड़कर अपने दल में शामिल करने के लिए प्रयासरत है, जिससे संबंधित समाचार आज के सभी समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ है। इस परिस्थिति में हमारी पार्टी समर्थन के मुद्दे पर पुनर्विचार करते हुए आपके नेतृत्व में चल रही UPA गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेती है।

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यह भी अटकलें हैं कि जेवीएम का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय हो सकता है, जो इस समय राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी है।हालांकि, JVM के समर्थन को वापस लेने से सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि 81 सदस्यीय सदन में उसके 47 विधायक हैं।
विधानसभा में अब JVM  के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत दो विधायक शेष हैं।JVM ने कल दिल्ली में पार्टी के विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और निष्कासित विधायक बंधू तिर्की के कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात का संज्ञान लिया और आज सरकार से समर्थन वापसी का फैसला किया।इसके अलावा झाविमो ने पार्टी के विधायक दल के नेता प्रदीप यादव को विधायक दल के नेता पद से भी पदच्युत कर दिया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आज लिखे अपने पत्र में बाबूलाल मरांडी ने कहा, ‘‘हमारी झाविमो ने 24 दिसंबर को आपके नेतृत्व में संप्रग गठबंधन सरकार को बिना शर्त समर्थन देने के लिए पत्र लिखा था।’’ मरांडी ने आगे लिखा है, ‘‘संप्रग गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी ही हमारी पार्टी के विधायकों को तोड़कर अपने दल में शामिल कराने के लिए प्रयासरत हैं। इस प्रकार का समाचार मीडिया में आया है।’’

मरांडी ने कहा है, ‘‘इस परिस्थिति में हमारी पार्टी समर्थन के मुद्दे पर पुर्निवचार करते हुए आपके नेतृत्व में चल रही संप्रग गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेती है।’’ नवंबर-दिसंबर 2019 में हुए झारखंड विधानसभा चुनावों में 81 सदस्यीय विधानसभा में झाविमो के तीन विधायक चुनाव जीत कर आए थे जबकि सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा को 30, उसकी सहयोगी कांग्रेस को 16 और राजद को एक सीट मिली थी।
(भाषा इनपुट्स के साथ)

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