दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में सोमवार रात पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाए गए। सुप्रीम कोर्ट में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के बाद साबरमती हॉस्टल के बाहर यह प्रदर्शन किया गया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रदर्शन जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) की तरफ से आयोजित किया गया था। इस पर सियासत भी शुरू हो गई है। भाजपा ने प्रदर्शन की भाषा को अभद्र बताते हुए इसे अलगाववादी सोच करार दिया है। वहीं कांग्रेस नेता उदित राज ने प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा कि यह विरोध करने का एक तरीका है।
इसी बीच, जनशक्ति जनता दल के मुखिया तेज प्रताप यादव ने जेएनयू में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को के खिलाफ विवादित टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। तेज प्रताप यादव ने कहा, “कल JNU कैंपस में PM मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ हुई कथित नारेबाजी पर कहा, “जो प्रदर्शन कर रहे हैं वो नासमझ हैं…प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए…हम चाहते हैं कि छात्र इस तरह की भाषा का प्रयोग ना करें क्योंकि युवा देश का भविष्य हैं…जो कार्रवाई हो रही है उसको सरकार देख रही है…।”
बात दें, JNU में सोमवार रात कुछ छात्रों ने पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाए। नारेबाजी का 35 सेकेंड का वीडियो मंगलवार को सामने आया। यह अब वायरल हो रहा है। वीडियो में छात्र ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर’ नारे लगाते और गाते दिखे। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, “जेएनयू में शहरी नक्सलियों द्वारा लगाए गए नारों को राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का वैचारिक समर्थन प्राप्त है। जब से सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की है, कांग्रेस नेता उनके समर्थन में सामने आए हैं। अब छात्रों की आड़ में शहरी नक्सली प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। क्या कांग्रेस पार्टी इन नारों का भी समर्थन करती है?…”
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दरअसल, एक दिन पहले 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था। JNU स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि हर साल छात्र 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं।
मिश्रा ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि विरोध प्रदर्शन में लगाए गए सभी नारे वैचारिक थे और किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं करते थे। वे किसी के लिए निर्देशित नहीं थे। हालांकि, मंगलवार दोपहर को JNU प्रशासन ने वसंत कुंज पुलिस को लेटर लिखा, जिसमें साबरमती हॉस्टल के बाहर नारे लगाने के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
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