दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीववाल ने कहा है कि देशभर में लोकतंत्र है, पर दिल्ली में इसका नामोनिशां नहीं मिलता। सीएम ने साथ ही ऐलान किया कि वह एक मार्च से अनशन पर बैठेंगे और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाएंगे। शनिवार (23 फरवरी, 2019) को उन्होंने ये बातें दिल्ली विधानसभा में कहीं। बकौल सीएम, “हम एक मार्च से अपने आंदोलन की शुरुआत करेंगे, ताकि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाया जा सके। हम इसे तब तक जारी रखेंगे, जब तक दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलता।”
केजरीवाल के मुताबिक, “देशभर में लोकतंत्र लागू है मगर दिल्ली में नहीं। जनता के वोटों से सरकार तो चुन ली जाती है, पर उसके पास कोई शक्तियां नहीं होती। यही कारण है कि हम एक मार्च से अपना आंदोलन शुरू करेंगे। मैं उसी दिन दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठूंगा।”
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सीएम केजरीवाल का यह ऐलान ऐसे समय पर आया है, जब दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच प्रशासनिक काम-काज को लेकर रिश्ते काफी समय से तल्ख हैं। बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली में तैनात अधिकारियों के ट्रांसफर व पोस्टिंग से जुड़े मसले छोड़ कर अन्य पांच मुद्दों पर फैसला स्पष्ट कर दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली सरकार के बजाय केंद्र को राजधानी में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश देने का अधिकार है। कोर्ट का यही बयान दिल्ली में केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार के लिए बड़ा झटका माना गया। केंद्र और दिल्ली सरकार को कोर्ट ने संदेश देते हुए कहा कि लोगों की सेवा के लिए दोनों का आपसी सहयोग जरूरी है।
केजरीवाल ने तब कहा था कि कोर्ट का फैसला लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने यह भी साफ किया था कि उनकी सरकार इस संबंध में कानूनी हल तलाशेगी। सुप्रीम कोर्ट में इसी को लेकर सीएम द्वारा कोर्ट की अवमानना के मसले पर जनहित याचिका दी गई। बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है, लिहाजा यहां की सरकार के पास सीमित अधिकार हैं। केंद्र के अधिकार क्षेत्र में भूमि, कानून-व्यवस्था और पुलिस आते हैं।

