भारत सरकार के एक आंकड़े के मुताबिक पिछले छह सालों में विभिन्न धोखाधड़ी और जालसाजी मामलों में भारतीयों ने 52,976 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। ये आंकड़ा गृह मंत्रालय के आई4सी विभाग ने जारी किया है।
ये आंकड़े देशभर में वित्तीय धोखाधड़ी जिनमें निवेश जाल, डिजिटल गिरफ्तारी, ऑनलाइन घोटाले, बैंकिंग धोखाधड़ी और साइबर फ़िशिंग जैसे मामले शामिल हैं।
2025 में अकेले 19 हजार करोड़ से अधिक ठगी
इंडियन एक्सप्रेस ने आकंड़ों पर गौर किया है। इसमें राष्ट्रीय अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 में करीब 19812.96 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई और इससे संबंधित 21,77,524 शिकायतें आईं। वहीं, एक सीनियर अधिकारी ने इस पर बात करते हुए कहा कि साल 2024 में करीब 22,848.49 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई और इसकी 19,188,52 शिकायतें दर्ज हुईं। साल 2023 में करीब 7,463.2 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और 13,103,61 शिकायतें आईं। साल 2022 में करीब 2,290.23 करोड़ रुपये नुकसान हुआ और 69,44,46 शिकायतें आईं। साल 2021 में 551.65 करोड़ रुपये की हानि हुई और 2,62,846 शिकायतें आईं और साल 2020 में 8.56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और 12,77,46 शिकायतें आईं।”
यह राज्य सबसे अधिक लूटा
पिछले साल दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों पर गौर किया गया तो पता चला है कि देशभर की तुलना महाराष्ट्र के लोगों को इन धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों में सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ है। महाराष्ट्र 3,203 करोड़ रुपये के नुकसान और 28,33,20 शिकायतों के साथ लिस्ट में सबसे ऊपर रहा, इसके बाद कर्नाटक 2,413 करोड़ रुपये के नुकसान और 21,32,28 शिकायतों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। आंकड़ों के मानें, तमिलनाडु 1,897 करोड़ रुपये के नुकसान और 12,32,90 शिकायतों के साथ, यूपी 1,443 करोड़ रुपये की हानि और 27,52,64 शिकायतों के साथ और तेलंगाना 1,372 करोड़ रुपये के नुकसान और 95,000 शिकायतों के साथ धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों से सबसे बुरी तरह प्रभावित टॉप पांच राज्यों में शामिल रहे।
एक अधिकारी ने कहा कि इन पांच राज्यों में ही देश में कुल वित्तीय धोखाधड़ी के आधे से अधिक आपराधिक केस शामिल है।
77 प्रतिशत निवेश के नाम पर ठगे गए
देश भर में 2025 में वित्तीय धोखाधड़ी, निवेश योजनाओं और साइबर घोटालों से जुड़ी कुल राशि 19,812 करोड़ रुपये रही। आंकड़ों के मुताबिक, “टॉप पांच राज्यों के अलावा, गुजरात में 1,312.26 करोड़ रुपये, दिल्ली में 1,163 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल में 1073.98 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मणिपुर में 16.74 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और धोखाधड़ी के लगभग 1,807 मामले दर्ज किए गए।”
आंकड़ों के अनुसार, “2025 में कुल 19,812 करोड़ रुपये में से 77 प्रतिशत निवेश योजनाओं के नाम पर, 8 प्रतिशत डिजिटल गिरफ्तारी के माध्यम से, 7 फीसदी क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी से, 4 फीसदी यौन उत्पीड़न से, 3 फीसदी ई-कॉमर्स धोखाधड़ी से और 1 प्रतिशत ऐप/मैलवेयर आधारित धोखाधड़ी से नुकसान हुआ।”
जांचकर्ताओं ने कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी तेजी से बढ़ी है, इसका कारण तेजी से हो रहा डिजिटलीकरण, ऑनलाइन लेनदेन में बढ़ोतरी और धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्कों की बढ़ती जटिलता है।
एक अधिकारी ने कहा कि इन अपराधों में देखा जाए तो शहर सबसे बड़े निशाने बने हैं। वहीं, छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोन और निवेश के नाम पर भी अब बढ़ोतरी देखी जा रही है।
