दिल्ली के करीब दो हजार कोटाधारकों ने रविवार को चार महीने से मेहनताना न दिए जाने का विरोध करते हुए दुकानें तो खोली लेकिन राशन वितरण नहीं किया। कोटाधारकों ने अपनी ई-पोस मशीनों को बंद कर विरोध जाहिर किया व कई सर्किलों में तो शनिवार को ही कोटाधारक अपनी ई-पोस मशीनों को सर्किल कार्यालयों में जमा करवा आए थे। वहीं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने साफ कहा कि जो दुकान बंद मिलेगी उसके खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी।
राशन के लिए धक्का खा रहे कार्डधारक
यूनियन व विभाग की इस खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी गरीब राशनकार्डधारियों को झेलनी पड़ी और वो पूरे दिन एक दुकान से दूसरी दुकान राशन के लिए धक्के खाते दिखे। बता दें कि यूनियन ने मांगों को विभाग को लिखकर व ईमेल के जरिए भेजा है। इसमें चार महीने का मेहनताना दिए जाने के साथ ही अग्रिम मेहनताना दिए जाने, सात सालों से मेहनताना ना बढ़ाए जाने, कोटाधारकों को अतिरिक्त कमीशन 40 महीने से नहीं दिए जाने, राशन दुकानों से अन्य वस्तुओं की बिक्री की अनुमति व ई-पोस मशीनों की दिक्कतों को दूर करना शामिल है।
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संशोधित बजट के लिए हमने दिल्ली सरकार से अनुरोध किया है : उपायुक्त
कोटाधारकों द्वारा राशन वितरण बंद करने पर विभाग ने रविवार को साप्ताहिक अवकाश होते हुए भी अपने सभी सर्किल अधिकारियों को काम पर बुला लिया और प्रत्येक दुकानों पर जाकर उनका जायना लेने को कहा। साथ ही सभी कोटाधारकों को खाद्य संभरण अधिकारी (एफएसओ) द्वारा निर्देशित किया गया कि यदि दुकानें बंद पाई गई तो उनका लाइसेंस निरस्त भी किया जा सकता है।
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खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के उपायुक्त सुशील कुमार सिंह से कोटाधारकों के विरोध के बाबत पूछे जाने पर कहा कि हमने संशोधित बजट के लिए दिल्ली सरकार से अनुरोध किया है। कोटाधारकों को हर महीने साढे आठ करोड़ रुपए कमीशन दिया जाता है. लेकिन अभी हमारे पास करीब तीन करोड रुपए है जिससे आधे कोटाधारकों को भी मेहनताना नहीं दिया जा सकता है।
