दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। उमर खालिद ओर शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।
रेखा गुप्ता ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जिन्होंने दिल्ली को दंगों की आग में धकेला उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए और वे लोग और राजनीतिक पार्टियां जिन्होंने ऐसे दंगाइयों का सहयोग किया उन्हें भी कड़ा संदेश मिलना चाहिए वह भी सज़ा के भागीदार हैं।
मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि शुरू से ये बात सामने आ रही थी कि दिल्ली का दंगा सोची समझी साजिश के साथ किया गया था। लंबी तैयारी के साथ किया गया था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसे पुन: साबित करता है।”
दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने कहा, “…यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस विधानसभा के कुछ लोगों ने भी शरजील इमाम के साथ मंच साझा किया है, उन्हें और उनके दलों को दिल्ली और देश से माफी मांगनी चाहिए। आपको सरकार, सरकार के मुखिया, सरकार की नीतियों का विरोध करने की अनुमति हो सकती है, लेकिन भारत के टूकड़े करने की अनुमति कैसे कोई दे सकता है… यह निंदनीय है…”
मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “किसी भी दंगाई को सख्त सज़ा मिलनी चाहिए। यह कांग्रेस का राज था जब दंगाइयों को पुरस्कृत किया जाता था, मंत्री बनाया जाता था। भाजपा के शासन में दंगाई जेलों में ही रहेंगे…अगर इस तरह के फैसले 1984 में आए होते तो उसके बाद देश में कोई दंगे नहीं होते।”
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “मैं न्यायपालिका के फैसले का स्वागत करता हूं। उमर खालिद और शरजील इमाम ने चिकन नेक को काटने और देश के खिलाफ नफरत फैलाने का काम किया है; जो काम पाकिस्तान कर रहा है वही काम ये कर रहे हैं। जो काम कसाब ने किया उसी तरह का काम ये कर रहे हैं। जो लोग उनका साथ दे रहे हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए।”
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने पूरी साजिश के साक्ष्यों का परीक्षण किया और गंभीरता से देखा कि इनका मामला जमानत देने लायक नहीं है क्योंकि ये उसके मूल सूत्रधार थे। जो लोग बार-बार उनके अधिकारों की बात करते हैं, मैं यही कहूंगा कि लगभग 50 से अधिक लोग दंगे में मारे गए इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। मैं न्यायालय के फैसले का स्वागत करता हूं।”
शिवसेना नेता शाइना एन.सी ने कहा, “हम न्यायपालिका के फैसले का स्वागत करते हैं क्योंकि भारत की नीति हमेशा से आतंकवाद, आतंकवादी संगठनों या आतंक का समर्थन करने वाले लोगों के मामले में कोई समझौता नहीं करने की रही है और जब इस तरह का फैसला आता है तो यह सरकार और भारत के लोगों को सामूहिक रूप से आतंकवाद से लड़ने के लिए सशक्त बनाता है…”
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज करने पर कहा, “उन्होंने कहा है कि UAPA के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसी कोई चीज़ नहीं होती। अब, UAPA के तहत आरोप लगाए गए हैं, लेकिन 5 साल से कोई चार्जशीट दायर नहीं की गई है… कोई चार्जशीट नहीं है, ज़मानत नहीं मिल रही थी, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, कुछ लोगों को ज़मानत मिल गई, लेकिन इन दोनों को नहीं मिली। मुझे उम्मीद है कि इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दायर की जाएगी और कार्रवाई शुरू होगी…”
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वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज करने पर कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि ज़मानत मौलिक अधिकार है तो मौलिक अधिकार अगर किसी व्यक्ति का है तो उसे भी देखा जाना चाहिए…”
बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 जनवरी) को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इस मामले में अन्य पांच आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी।
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