यूजीसी अपने नए नियम की वजह से चर्चा में है। यूजीसी ने 13 जनवरी को एक नया नियम लागू किया और इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। नए नियम का नाम ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ है। यूजीसी के इस नियम के बाद जनरल कैटेगरी का समाज नाराज बताया जा रहा है। जनरल कैटेगरी बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है।
कांग्रेस महासचिव ने केंद्र पर साधा निशाना
हालांकि यूजीसी के नियम के बाद समाज लगातार भाजपा और उसके नेतृत्व पर निशाना साध रहा है। हालांकि अब कांग्रेस के भी महासचिव ने यूजीसी के नए नियम को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह अलवर ने कहा कि UGC द्वारा लागू किए गए नियम स्टूडेंट्स को आपस में बांटने, एक-दूसरे का विरोधी बनाने प्रयास नजर आता है।
जितेंद्र सिंह अलवर ने X पर एक पोस्ट में कहा, “धर्म, जाति, जेंडर और बैकग्राउंड के आधार पर होने वाला भेदभाव एजुकेशनल इंस्टीट्यूट/यूनिवर्सिटी/कॉलेज के साथ ही किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। UGC द्वारा लागू किए गए ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ स्टूडेंट्स को आपस में बांटने, एक-दूसरे का विरोधी बनाने प्रयास नजर आता है। कोई छात्र, चाहे किसी भी कैटेगरी/वर्ग/जाति/समुदाय से हो; भेदभाव किसी के साथ भी नहीं होना चाहिए। निर्बाध शिक्षा सबका अधिकार है। यूनिवर्सिटी कैंपस में हर एक स्टूडेंट की सेफ्टी, सिक्योरिटी सुनिश्चित होनी चाहिए। UGC की नई गाइडलाइंस केंद्र सरकार की उस मंशा को उजागर करती है, जो स्टूडेंट्स को टारगेट करने, उन्हें भटकाने के साथ ही शिक्षा विरोधी है और हमारे एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स को ख़त्म करना चाहती है।”
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
यूजीसी के नए नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। इसके लिए एक जनहित याचिका भी डाली गई है। इस याचिका में नए नियम को भेदभावपूर्ण और मनमाना बताया गया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यूजीसी ने 13 जनवरी को जिस नियम को घोषित किया उसका 3C भेदभाव बढ़ाने वाला है। याचिकाकर्ता का 3C से मतलब इक्विटी रूल से था।
याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के इक्विटी रूल का सेक्शन 3C अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि यह नियम यूजीसी अधिनियम 1956 के विरुद्ध है और उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के रास्ते में बाधा बनता है। पढ़ें UGC रेगुलेशन का क्या है मुद्दा?
