चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को दिल्ली में भाजपा नेतृत्व के साथ वार्ता की थी। इसके एक दिन बाद, मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली स्थित मुख्यालय में आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की जिससे कांग्रेस और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है।
कांग्रेस ने भाजपा पर पाखंड का आरोप लगाया और बैठक को आत्मसमर्पण करार दिया। वहीं, बीजेपी ने कहा कि यह चर्चाएं अंतर-दलीय संचार को आगे बढ़ाने पर केंद्रित थीं जबकि आरएसएस ने इस यात्रा को शिष्टाचार भेंट बताया। आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “यह एक शिष्टाचार भेंट थी। अनुरोध उनकी ओर से आया था और हमने उसे स्वीकार कर लिया। बैठक का कोई निर्धारित एजेंडा नहीं था।” साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत यात्रा पर होने के कारण बैठक में उपस्थित नहीं थे।
चीनी प्रतिनिधिमंडल की आरएसएस नेताओं से मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, चीनी प्रतिनिधिमंडल ने आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले और उनकी टीम के साथ एक घंटे तक बैठक की। सोमवार को सीपीसी प्रतिनिधिमंडल और भाजपा के बीच हुई बातचीत में, पार्टियों के बीच आपसी संवाद को बढ़ावा देने पर चर्चा केंद्रित रही। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आरएसएस से महत्वपूर्ण संपर्क रखने वाले भाजपा नेता भी इस बातचीत में शामिल थे। आरएसएस के एक पदाधिकारी ने बताया, “वे संगठन और उसके कामकाज के बारे में जानने के लिए उत्सुक थे। हमने उन्हें अपने 100 साल के सफर, समाज में अपने काम और अपने दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से बताया।”
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भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर सोमवार की बैठक की पुष्टि की। एक पोस्ट में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव अरुण सिंह ने कहा, “चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (आईडीसीपीसी) के अंतर्राष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुश्री सुन हैयान ने आज भाजपा मुख्यालय का दौरा किया। बैठक के दौरान हमने भाजपा और सीपीसी के बीच संचार और संवाद को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।”
कांग्रेस का बीजेपी पर हमला
वहीं, कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमलावर है। मंगलवार को एआईसीसी विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद की सुन हैयान के नेतृत्व वाले सीपीसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद, कांग्रेस ने भाजपा पर पाखंड का आरोप लगाया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस बैठक को कमजोर आत्मसमर्पण बताया।
खेड़ा ने एक बयान में कहा, आत्मसमर्पण, यही भाजपा की चीन के प्रति नीति के लिए सबसे उपयुक्त शब्द है। चीन के साथ अपने व्यवहार में मोदी सरकार के पाखंड ने भारत की विदेश नीति को उलझा दिया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के ‘लाल आंख’ के दावे सीपीसी को ‘लाल सलाम’ में बदल गए हैं। इसके उदाहरण के रूप में उन्होंने गलवान संघर्ष, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन का समर्थन और चीनी ऐप्स और फंडिंग में कथित विसंगतियों का हवाला दिया। पवन खेड़ा ने कहा, “भाजपा को सीपीसी सदस्यों और चीनी अधिकारियों से मुलाकात को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाने की आदत है लेकिन असली सवाल यह होना चाहिए कि चीनी अधिकारियों और सीपीसी के साथ उनकी अपनी बैठकों में वास्तव में क्या हुआ?”
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर दिया ये जवाब
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा कि ये बैठकें भारत और चीन के बीच सुधरते संबंधों को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा, “औपचारिक बैठकें तब होती हैं जब स्थिति बेहतर होती है और यह ऐसी ही एक औपचारिक बैठक थी। हमारे लोगों की तुलना राहुल गांधी से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने जो किया है उसके बाद उन्हें हमारी विदेश नीति पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।”
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