West Bengal News: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से अपील की कि वे संविधान और लोकतंत्र को आपदा से बचाएं ताकि देश की उन संस्थाओं की रक्षा की जा सके जो खतरे में हैं। ममता बनर्जी कोलकाता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच के उद्घाटन समारोह में बोल रही थीं।
मुख्यमंत्री ने सीजेआई सूर्यकांत की मौजूदगी में कहा, “मैं भारत के मुख्य न्यायाधीश और सभी न्यायाधीशों से अनुरोध करती हूं कि वे संविधान, लोकतंत्र, न्यायपालिका, इतिहास और भूगोल के साथ-साथ देश की सीमाओं को भी आपदा से बचाएं।” इस बिल्डिंग को क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हुए कहा कि 40.08 एकड़ में फैला यह नया परिसर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बनाया गया था।
जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए- ममता
इस परिसर में छह कोर्ट रूम और जजों के लिए 80 रेजिडेंशियल कॉम्पलेक्स शामिल हैं। इनमें हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए एक बंगला भी शामिल है। सीएम बनर्जी ने कहा, “जाति, पंथ या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। आइए हम सब मिलकर काम करें और एकता की बात करें। यह इमारत कलकत्ता हाई कोर्ट की इमारत से भी बेहतर है। केंद्र सरकार द्वारा फंड जारी न किए जाने के बावजूद, इस इमारत को छोड़कर हम पहले ही 1200 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं।”
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “तीन महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। पहला, संविधान; दूसरा, इस देश के नागरिक; तीसरा, न्यायपालिका और चौथा, मीडिया। आप सभी को मेरा सादर प्रणाम। कृपया वकीलों की हमारी नई पीढ़ी का ध्यान रखें। युवा वकील संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें उचित लाभ नहीं मिल रहे है,; हम चाहते हैं कि उन्हें उचित सहयोग मिले।”
जांच एजेंसियों की भूमिका पर चिंता जाहिर की
बनर्जी ने कानूनी फैसले सुनाए जाने से पहले जनता की राय को प्रभावित करने में जांच एजेंसियों और मीडिया की भूमिका पर भी चिंता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने टिप्पणी करते हुए कहा, “मामलों के अंतिम फैसले से पहले मीडिया ट्रायल नहीं होने चाहिए। यह लोगों को बदनाम करने का एक जरिया बन गया है। कृपया सुनिश्चित करें कि एजेंसियां जानबूझकर नागरिकों को बदनाम करने का प्रयास न करें। मैं अपनी ओर से नहीं बोल रही हूं। मैं लोकतंत्र, जनता, न्यायपालिका और संविधान को बचाने के लिए बोल रही हूं। हम आपकी देखरेख में हैं। आपसे ऊपर कोई नहीं है।” इस अवसर पर सीजेआई सूर्यकांत, कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता, मेघवाल और राज्य के कानून मंत्री मोलोय घटक मौजूद थे।
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