ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी दी कि प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में आए शाह फैसल बीते 14 अगस्त को स्टूडेंट वीजा न होने की वजह से दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किए गए थे। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने अदालत के समक्ष दायर एक हलफनामे में कहा कि फैसल को हिरासत में लेते समय उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने कहा कि गिरफ्तार के समय फैसल के पास बी1/बी2 वीजा था जो कि उन्हें अमेरिकी सरकार ने 10 वर्ष के लिए जारी किया है। ब्यूरो ने कहा ‘यह एक टूरिस्ट वीजा है न कि स्टूडेंट वीजा। याचिकाकर्ता (फैसल) इस वीजा के जरिए 14 अगस्त को ट्रैवल करना चाह रहे थे। जबकि उन्होंने पूछताछ के दौरान कहा था कि वह अपनी पढ़ाई के सिलसिले में यूएस जा रहे हैं।’ ब्यूरो के मुातिबक फैसल का वीजा उनको यूएस में पढ़ाई करने की अनुमित नहीं देता।
मालूम हो कि शाह ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका दायर की हुई है। पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपनी याचिका में दावा किया कि वह उच्च शिक्षा अध्ययन के लिए अमेरिका स्थित हार्वर्ड यूनिर्विसटी जा रहे थे, तब उन्हें दिल्ली हवाईअड्डे पर जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। उन्हें श्रीनगर ले जाया गया। ज्ञात हो कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
वहीं कोर्ट ने फैसल की उस याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर की प्रति मांगी है। वह फिलहाल श्रीनगर में हिरासत में हैं। कोर्ट ने केंद्र से दो सितंबर तक जवाब देने को कहा और मामले को फैसल की ओर से उनकी हिरासत के खिलाफ दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के साथ तीन सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। फैसल की वकील वारिसा सरासत ने कहा कि वे नहीं जानते कि लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) किस आधार पर जारी किया गया है।

