दिल्ली गैंगरेप (Delhi Gang rape Case) के चारों दोषियों को आज सुबह तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया। मेरठ के रहने वाले पवन जल्लाद (Pawan Jallad) ने दोषियों को फांसी पर लटकाया। आपको बता दें कि पवन अधिकृत तौर पर उत्तर प्रदेश की मेरठ जेल से जुड़ा है और हर महीने बाकायदा वेतन भी लेता है। तिहाड़ जेल प्रशासन के अनुरोध पर मेरठ जेल से उसे यहां भेजा गया था।

फेरी लगाकर बेचता है कपड़े : पवन मूल रूप से मेरठ का ही रहने वाला है। भारत में इस वक्त गिने-चुने ही  जल्लाद बचे हैं, जिनमें से पवन भी एक है। उसकी कई पीढ़ियां भी फांसी देने का ही काम करती रही हैं। चूंकि फांसी देने के मामले बेहद कम आते हैं, ऐसे में गुजर-बसर के लिए पवन फेरी लगाकर कपड़े भी बेचता है।

दादा ने दी थी रंगा-बिल्ला को फांसी: नेटवर्क-18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक पवन की पिछली चार पीढ़ियां फांसी देने का काम करती रही हैं। पवन पहले अपने दादा और बाद में पिता के साथ फांसी देने में उनकी मदद करता था और बाद में खुद फांसी देने का काम करने लगा। पवन के दादा कालू जल्लाद ने अपने समय में 60 से ज्यादा लोगों को फांसी दी थी, जिनमें उस जमाने के खूंखार रंगा-बिल्ला भी शामिल थे।

इसके अलावा कालू जल्लाद इंदिरा गांधी के हत्यारों केहर सिंह और सतवंत सिंह की फांसी में भी शामिल था। इसी तरह पवन के पिता, मम्मू सिंह ने भी तमाम दोषियों को फांसी दी थी। मुंबई हमले के दोषी आतंकी अजमल कसाब को फांसी के लिए भी मम्मू को बुलाया गया था, लेकिन बीच में ही उसका देहांत हो गया था। बाद में किसी और जल्लाद ने कसाब को फांसी दी।

पवन ने तोड़ा अपने दादा का रिकॉर्ड: पवन जल्लाद ने चार दोषियों को एक साथ फांसी पर चढ़ाकर अपने दादा कालू जल्लाद का रिकॉर्ड तोड़ दिया। कालूराम ने एक साथ दो दोषियों को फांसी दी थी। बता दें कि दिल्ली गैंगरेप के दोषियों को फांसी देने के लिए पवन कई दिनों से प्रैक्टिस कर रहा था और बाकायदे डमी तैयार कर उसे फांसी पर लटकाया था। ताकि ऐन वक्त पर कोई गड़बड़ी न हो।

दोषियों को फांसी पर लटकाने के मिले 60 हज़ार: दिल्ली गैंगरेप के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन ने पवन जल्लाद को कुल 60 हज़ार रुपये का पेमेंट किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हर दोषी को फांसी पर लटकाने के एवज में पवन को पंद्रह हज़ार रुपये दिए गए।

‘यह मेरी ड्यूटी, इस काम को बुरा नहीं मानता’: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पवन के परिवार में कुल 7 लोग हैं। उन्हें मेरठ जेल से हर महीने 5000 रुपये तनख्वाह मिलती है। पवन का कहना है कि वह अपने बेटों को जल्लाद नहीं बनाएंगे। वे कहते हैं कि फांसी देना मेरा पेशा और ड्यूटी है। मैं इस काम को बुरा नहीं मानता।