IRCTC Scam: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने IRCTC घोटाले से जुड़े मामले में उनके और उनके परिवार के खिलाफ तय किए गए आपराधिक आरोपों को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला 5 जनवरी को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
इससे पहले 13 अक्टूबर को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय किए थे। वहीं, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप हैं।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई का आरोप है कि जब लालू यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे, तब उन्होंने IRCTC के दो होटल-रांची और पुरी और एक निजी कंपनी सुजाता होटल्स को गलत तरीके से पट्टे पर दिलवाए। इसके बदले में, उनके परिवार से जुड़ी एक कंपनी को करोड़ों रुपये की जमीन बहुत कम कीमत पर दी गई। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह जमीन लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव से जुड़ी कंपनी को बाजार मूल्य से काफी कम दाम पर ट्रांसफर कर दी गई।
यादव परिवार ने जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उनका दावा है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है। 13 अक्टूबर को पारित एक विस्तृत आदेश में, निचली अदालत ने कहा कि वह इस प्रथम दृष्टया निष्कर्ष पर पहुंची है कि लालू यादव को प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी थी और उन्होंने होटलों के हस्तांतरण को प्रभावित करने के लिए हस्तक्षेप किया था।
अदालत ने कहा कि होटल देने की निविदा प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे। यह साफ तौर पर संभावना है कि जमीन बेचते समय उसकी कीमत जानबूझकर कम दिखाई गई और बाद में वही जमीन लालू यादव के हाथ चली गई। अदालत ने यह भी माना कि लालू यादव के इन कदमों से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
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न्यायालय ने कहा कि इस मामले में कई लोग शामिल थे और यह एक साजिश थी, जिसमें अलग-अलग स्तर पर कई छोटी साजिशें भी हो सकती हैं। अदालत ने यह भी जोर देकर कहा कि निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के नाम पर पूरी प्रक्रिया भाई-भतीजावाद और पूंजीवाद के गलत मेल जैसी थी।
अंत में अदालत ने कहा कि यह साजिश पूरी तरह छिपी हुई नहीं है। पूरा लेन-देन पहली नजर में ही धोखाधड़ी वाला लगता है, इसलिए इस चरण पर आरोपियों को बरी नहीं किया जा सकता।
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