IRCTC Corruption Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। यह याचिका IRCTC घोटाले से जुड़े उस निचली अदालत के आदेश के खिलाफ है, जिसमें लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों पर आपराधिक आरोप तय किए गए हैं।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, लालू यादव की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिबल और मनिंदर सिंह अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की। अदालत को यह भी बताया गया कि पिछले एक महीने में इस मामले में दो गवाहों से पूछताछ हो चुकी है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि सीबीआई अपना जवाब दाखिल करने के बाद 14 जनवरी को अगली सुनवाई के दिन लालू यादव की कार्यवाही पर रोक लगाने वाली याचिका पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि पहले सीबीआई को जवाब दाखिल करने दीजिए। आपको यह याचिका पहले लानी चाहिए थी।

इससे पहले 13 अक्टूबर को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज विशाल गोगने ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय किए थे। वहीं तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

सीबीआई का आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव और उनके परिवार ने एक निजी कंपनी को ठेके देने के बदले रिश्वत के तौर पर जमीन और शेयर लिए थे।

जांच एजेंसी के अनुसार, 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान IRCTC के रांची और पुरी स्थित दो होटलों को गलत तरीके से की गई निविदा प्रक्रिया के जरिए सुजाता होटल्स नाम की कंपनी को पट्टे पर दिया गया। इसके बदले में करोड़ों रुपये की जमीन लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव से जुड़ी एक कंपनी को बाजार कीमत से बहुत कम दाम पर दी गई थी।

लालू परिवार ने जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से दर्ज किया गया है।

हालांकि, 13 अक्टूबर को दिए गए अपने विस्तृत आदेश में निचली अदालत ने कहा कि शुरुआती तौर पर यह साफ होता है कि लालू यादव को पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी और उन्होंने होटलों के हस्तांतरण को प्रभावित करने के लिए दखल दिया।

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अदालत ने कहा कि निविदा प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए गए थे। साथ ही, यह भी सामने आया है कि जमीन की बिक्री के समय उसका मूल्य कम आंका गया और बाद में वह जमीन लालू यादव से जुड़ी इकाइयों के पास चली गई। कोर्ट ने माना कि लालू यादव की इन कार्रवाइयों से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में कई लोग शामिल थे और यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कई छोटी-छोटी साजिशें शामिल थीं।

इसके अलावा, न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि पूरी प्रक्रिया निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की आड़ में भाई-भतीजावाद पूंजीवाद के समान थी। आदेश में कहा गया है कि यह साजिश पूरी तरह से छिपी हुई नहीं है, पूरा लेन-देन प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का है, और इस स्तर पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता है।

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